More
    HomeHindi NewsDelhi Newsनेपाल में विनाशकारी बाढ़ से तबाही का मंजर, 903 की मौत, 4247...

    नेपाल में विनाशकारी बाढ़ से तबाही का मंजर, 903 की मौत, 4247 लोग लापता, खतरे के बीच बचाव अभियान में चुनौती

    नेपाल में हिमालयी क्षेत्र से आई विनाशकारी बाढ़ ने तबाही का ऐसा मंजर पैदा किया है कि मरने वालों की संख्या 903 तक पहुंच गई है। वहीं हजारों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल की आपदा एजेंसियों के मुताबिक, करीब 4,247 लोगों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इस बीच प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन खराब मौसम, दुर्गम पहाड़ी इलाके और दोबारा बाढ़ आने के खतरे ने बचाव दलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

    ग्लेशियर टूटने के बाद आई विनाशकारी बाढ़

    नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने के बाद भोटे कोशी नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा। इसके बाद आई फ्लैश फ्लड ने कई बस्तियों, सड़कों और पुलों को अपनी चपेट में ले लिया। वैज्ञानिकों के मुताबिक, ग्लेशियर के नीचे चट्टानी आधार के टूटने से बड़े पैमाने पर बर्फ और चट्टानों का मलबा नीचे आया, जिससे नदी का बहाव अचानक बेहद तेज हो गया। इस घटना को लगभग 5.2 तीव्रता के भूकंपीय झटके के रूप में भी दर्ज किया गया।

    बाढ़ का सबसे ज्यादा असर नेपाल के रसुवा और आसपास के इलाकों में दिखाई दिया है। कई स्थानों पर सड़क संपर्क टूट गया है और बिजली तथा संचार व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। बड़ी संख्या में लोग सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए हैं।

    4 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता

    नेपाल में मृतकों की संख्या 903 होने के साथ ही 4,247 लोगों के लापता होने की सूचना है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जिनका बाढ़ के बाद परिवारों से संपर्क टूट गया। अधिकारियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों को ढूंढना और दुर्गम इलाकों तक पहुंचना है।

    हाइड्रोपावर परियोजनाओं में फंसे लोगों को निकालने के लिए भी विशेष अभियान चलाया जा रहा है। कई सुरंगें मलबे से बंद हैं और उनके भीतर फंसे लोगों तक पहुंचने के लिए नेपाली सेना के साथ विशेषज्ञ टीमें काम कर रही हैं। करीब 21 हजार सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव अभियान में लगाए गए हैं।

    फिर बाढ़ आने का खतरा

    बचाव अभियान के बीच सबसे बड़ी चिंता दोबारा बाढ़ आने की आशंका है। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन के कारण बनी एक झील में पानी बढ़ने और उसके ओवरफ्लो होने का खतरा सामने आया है। इसी वजह से कुछ इलाकों में बचाव अभियान को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था।

    प्रशासन का ध्यान अब एक तरफ लापता लोगों को खोजने पर है, वहीं दूसरी ओर संभावित नई बाढ़ से बचाव की तैयारी पर भी है। प्रभावित इलाकों में लोगों को नदियों और कमजोर ढलानों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है।

    भारत और अन्य देशों से भी मदद

    आपदा के बाद राहत एवं बचाव प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी सामने आया है। नेपाल में फंसे लोगों को निकालने और विशेष रूप से हाइड्रोपावर सुरंगों में बचाव अभियान के लिए भारतीय और चीनी विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं।

    फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती हजारों लापता लोगों का पता लगाना, दूरदराज के इलाकों में राहत पहुंचाना और संभावित दूसरी बाढ़ से लोगों को सुरक्षित रखना है। लगातार बदलते मौसम और अस्थिर पहाड़ी भूभाग के कारण आने वाले घंटे बचाव अभियान के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments