5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A के प्रावधानों को निरस्त किए जाने के सात वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक निर्णय के बाद जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सुरक्षा परिदृश्य में अभूतपूर्व और दूरगामी बदलाव देखने को मिले हैं।
1. सुरक्षा स्थिति और पत्थरबाज़ी पर लगाम
अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार दर्ज किया गया है:
- हड़ताल और पत्थरबाज़ी की समाप्ति: कश्मीर घाटी में पूर्व में होने वाले प्रायोजित बंद (हड़ताल) और पत्थरबाज़ी की घटनाएं अब अतीत की बात बन चुकी हैं। श्रीनगर का ऐतिहासिक लाल चौक अब देर रात तक पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों से गुलजार रहता है।
- आतंकवाद पर कड़ा प्रहार: सुरक्षा बलों ने आतंकवाद के इकोसिस्टम, टेरर फंडिंग (Terror Funding) और अलगाववादी संगठनों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने में सफलता पाई है। हालांकि, जम्मू संभाग के सीमावर्ती इलाकों (राजौरी-पुंछ) में छिटपुट सुरक्षा चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
2. राजनीतिक परिवर्तन और लोकतांत्रिक प्रक्रिया
अनुच्छेद 370 हटने के बाद केंद्र शासित प्रदेश में त्रिस्तरीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की बहाली हुई:
- स्थानीय निकाय और विधानसभा: परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद पंचायती राज संस्थाओं, जिला विकास परिषदों (DDC) और विधानसभा चुनावों के माध्यम से जमीनी स्तर पर लोकतंत्र मजबूत हुआ है।
- राज्य के दर्जे की मांग: स्थानीय राजनीतिक दलों द्वारा जम्मू-कश्मीर को पुन: पूर्ण राज्य (Statehood) का दर्जा देने की मांग लगातार उठाई जा रही है।
3. सामाजिक न्याय और अधिकारों का विस्तार
पूर्व में अनुच्छेद 370 और 35A के कारण कई समुदायों के बुनियादी अधिकार सीमित थे, जिनमें व्यापक सुधार हुआ:
- समान अधिकार: वेस्ट पाकिस्तानी शरणार्थियों, वाल्मीकि समाज, गोरखा समुदाय और अन्य वंचित वर्गों को डोमिसाइल (स्थायी निवास) अधिकार, मतदान के अधिकार और सरकारी नौकरियों में अवसर मिले।
- केंद्रीय कानूनों का लागू होना: भारत का संविधान पूरी तरह से लागू होने से शिक्षा का अधिकार (RTE), सूचना का अधिकार (RTI) और अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) आरक्षण कानून जम्मू-कश्मीर में निष्प्रभावी से प्रभावी बने।
4. बुनियादी ढांचा और आर्थिक विकास
केंद्र सरकार के विशेष पैकेज और विकास परियोजनाओं के माध्यम से इंफ्रास्ट्रक्चर में तेज़ी आई है:
- कनेक्टिविटी व प्रोजेक्ट्स: दुनिया के सबसे ऊंचे रेलवे आर्च ब्रिज ‘चिनाब ब्रिज’ से लेकर ज़ोजिला टनल जैसी मेगा परियोजनाओं ने जम्मू-कश्मीर को शेष भारत के साथ बारहमासी कनेक्टिविटी दी है।
- शिक्षा व स्वास्थ्य: जम्मू और श्रीनगर दोनों संभागों में एम्स (AIIMS), आईआईटी (IIT), आईआईएम (IIM) और नए मेडिकल कॉलेजों का संचालन शुरू हो चुका है।
- स्मार्ट सिटी और निवेश: श्रीनगर और जम्मू में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स के तहत बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण किया गया है, जिससे निजी निवेश को बढ़ावा मिला है।
| प्रमुख क्षेत्र | 2019 से पूर्व की स्थिति | 7 साल बाद (वर्तमान स्थिति) |
|---|---|---|
| पर्यटन (Annual Footfall) | सीमित एवं सुरक्षा निर्भर | रिकॉर्ड 2 करोड़+ पर्यटक वार्षिक |
| पत्थरबाज़ी व हड़ताल | आए दिन प्रायोजित घटनाएं | शून्य के करीब / पूरी तरह नियंत्रित |
| केंद्रीय कानून | विशेष मंज़ूरी की आवश्यकता | सभी केंद्रीय कानून स्वतः लागू |
| स्थानीय निकाय अधिकार | सीमित और बाधित | त्रिस्तरीय पंचायती राज प्रभावी |
5. पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था
पर्यटन क्षेत्र जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की रीढ़ साबित हुआ है:
- पर्यटकों का नया रिकॉर्ड: पिछले कुछ वर्षों में गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग के साथ-साथ ऑफ-बीट टूरिस्ट डेस्टिनेशन्स पर रिकॉर्ड संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक पहुंचे हैं।
- अंतर्राष्ट्रीय मंच: श्रीनगर में आयोजित G-20 बैठक और कई राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों ने वैश्विक स्तर पर घाटी की सकारात्मक छवि प्रस्तुत की।
6. वर्तमान चुनौतियां और भविष्य की राह
हालांकि बीते सात वर्षों में व्यापक सुधार हुए हैं, लेकिन कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं:
- बेरोजगारी और औद्योगिक निवेश: युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करना और निजी क्षेत्र में बड़े औद्योगिक निवेश को धरातल पर लाना निरंतर प्राथमिकता बना हुआ है।
- पूर्ण राज्य का दर्जा: स्थानीय जनता और राजनीतिक नेतृत्व की प्रमुख आकांक्षा जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा वापस दिलाना है।
निष्कर्ष: बीते सात वर्षों में जम्मू-कश्मीर अलगाववाद और अस्थिरता के दौर से निकलकर विकास, स्थिरता और राष्ट्रीय मुख्यधारा के मार्ग पर तेज़ी से आगे बढ़ा है।


