सुप्रीम कोर्ट ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा 5 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रस्तावित ‘विरोध मार्च’ (Protest March) पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना सरकार और पुलिस अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है, इसलिए इस विषय में उन्हें संबंधित अधिकारियों से संपर्क करना चाहिए।
क्या है पूरा मामला? कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने 5 सितंबर को इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है। यह प्रदर्शन नीट (NEET) परीक्षा से जुड़े मामलों, 20 जुलाई की कथित पुलिस कार्रवाई और सरकार द्वारा 25 जुलाई को दी गई कथित प्रतिबद्धताओं को पूरा न करने के विरोध में आयोजित किया जा रहा है।
इसके जवाब में, दिल्ली पुलिस के पूर्व अधिकारी राजेंद्र सिंह और अन्य याचिकाकर्ताओं ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। याचिका में दलील दी गई थी कि राजधानी के लुटियंस जोन जैसे सुरक्षा-संवेदनशील क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमावड़े से अव्यवस्था फैल सकती है। इसके अलावा, दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का हवाला देते हुए मार्च को स्थगित करने या इसकी अनुमति न देने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट की मुख्य टिप्पणियां: मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान याचिका खारिज करते हुए कई अहम निर्देश और टिप्पणियां कीं:
- अधिकारियों का अधिकार क्षेत्र: पीठ ने स्पष्ट किया कि किसी जुलूस या प्रदर्शन की अनुमति देना या उसे रोकना कानून-व्यवस्था से जुड़ा विषय है, जिसे केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को तय करना है।
- शांति की उम्मीद: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालत फिलहाल यह मानकर नहीं चल सकती कि कोई अप्रिय घटना या हिंसा होगी। अदालत को भरोसा है कि सभी पक्ष कानून के दायरे में रहकर और शांतिपूर्ण तरीके से आचरण करेंगे।
- हाई-पावर्ड कमेटी को रेफर: शीर्ष अदालत ने इस याचिका को पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता वाली उस पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति (HPEC) के पास भेजने का निर्देश दिया, जो 20 जुलाई के प्रदर्शनों से जुड़ी शिकायतों की जांच कर रही है।
- अगली सुनवाई: मामले को केंद्र और दिल्ली सरकार को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 10 सितंबर 2026 तय की गई है। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को यह छूट भी दी कि यदि 5 सितंबर से पहले कोई अत्यंत चिंताजनक स्थिति उत्पन्न होती है, तो वे दोबारा अदालत के समक्ष मामला रख सकते हैं।


