पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी को और मजबूत करते हुए एक बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी नौसेना का विशालकाय विमानवाहक पोत USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश (CVN 77) अब खाड़ी क्षेत्र में पहुँच गया है। यह तैनाती ऐसे समय में हुई है जब होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव अपने चरम पर है और समुद्री सुरक्षा को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं।
मध्य पूर्व में अमेरिकी नौसेना की ताकत
USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश के खाड़ी क्षेत्र में पहुँचने के साथ ही अब इस क्षेत्र में अमेरिका के तीन सक्रिय विमानवाहक पोत (Aircraft Carriers) तैनात हो गए हैं।
- त्रिकोणीय सुरक्षा: वर्तमान में USS अब्राहम लिंकन और USS जेराल्ड आर. फोर्ड पहले से ही इस क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
- हवाई शक्ति: यह विमानवाहक पोत दर्जनों लड़ाकू विमानों, जासूसी विमानों और उन्नत मिसाइल रक्षा प्रणालियों से लैस है, जो इसे समुद्र में एक तैरता हुआ किला बनाता है।
- रणनीतिक उद्देश्य: अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस तैनाती का उद्देश्य ईरान समर्थित समूहों को रोकना और होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखना है।
होर्मुज जलडमरूमध्य: संकट का केंद्र
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जहाँ से वैश्विक कच्चे तेल का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। हाल के हफ्तों में ईरान द्वारा इस जलमार्ग पर “टोल” वसूलने और जहाजों को रोकने के प्रयासों ने तनाव बढ़ा दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में नौसेना को स्पष्ट आदेश दिए हैं कि यदि ईरानी छोटी नावें (Small Boats) होर्मुज में बारूदी सुरंगें बिछाने या अमेरिकी जहाजों को परेशान करने की कोशिश करती हैं, तो उन्हें बिना किसी हिचकिचाहट के “नष्ट” (Shoot and Kill) कर दिया जाए।
संघर्ष विराम के बीच बढ़ती घेराबंदी
दिलचस्प बात यह है कि यह तैनाती उस समय हो रही है जब इस्राइल और लेबनान के बीच संघर्ष विराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ाया गया है।
- ईरान पर दबाव: विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका इस सैन्य जमावड़े के जरिए ईरान पर आर्थिक और सैन्य दबाव बनाना चाहता है ताकि वह क्षेत्रीय संघर्षों (जैसे हिजबुल्लाह और हूती विद्रोहियों के समर्थन) से पीछे हटे।
- नाकाबंदी (Blockade): रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की एक प्रकार से ‘समुद्री घेराबंदी’ शुरू कर दी है, जिससे ईरान के तेल निर्यात पर सीधा असर पड़ रहा है।
USS जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश की आमद से पश्चिम एशिया का शक्ति संतुलन अमेरिका के पक्ष में झुक गया है। हालांकि, यह भारी सैन्य मौजूदगी तनाव को कम करने के बजाय किसी बड़ी सैन्य भिड़ंत की चिंगारी भी बन सकती है। अगले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि यह शक्ति प्रदर्शन शांति लाएगा या युद्ध का नया मोर्चा खोल देगा।


