वैश्विक कूटनीति के पटल पर पिछले कुछ समय से तुर्किये (पुराना नाम तुर्की) के रुख में भारत को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का खुलकर साथ देने वाले और ‘पाकिस्तान के भाईजान’ के रूप में जाने जाने वाले तुर्किये को जब भारत ने कूटनीतिक रूप से पूरी तरह नजरअंदाज करना शुरू किया, तो अब उसके सुर बदलते नजर आ रहे हैं। तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान का हालिया बयान इस बात का गवाह है कि अंकारा अब भारत के साथ अपने बिगड़े संबंधों को सुधारने के लिए गंभीर प्रयास कर रहा है।
विदेश मंत्री हाकान फिदान का बड़ा बयान
तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने एक इंटरव्यू के दौरान भारत और तुर्किये के संबंधों पर खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत और तुर्किये के बीच कोई भी प्रत्यक्ष द्विपक्षीय विवाद नहीं है। फिदान ने कहा, “हमारे पास भारत के साथ कोई द्विपक्षीय विवाद नहीं है। हमारे संबंध ऐतिहासिक और मजबूत रहे हैं, और हम इन्हें और अधिक ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तुर्किये की तरफ से आया यह बयान भारत के प्रति उसके बदले हुए दृष्टिकोण को दर्शाता है। इससे पहले, तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोआन संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे वैश्विक मंचों पर लगातार कश्मीर का मुद्दा उठाकर भारत को असहज करने की कोशिश करते रहे थे, जिसके जवाब में भारत ने तुर्किये के धुर विरोधी देश ‘साइप्रस’ (Cyprus) के साथ अपने संबंध मजबूत कर तुर्किये को कड़ा संदेश दिया था।
भारत की अनदेखी और ‘साइप्रस कार्ड’ का असर
पाकिस्तान के तुष्टिकरण के लिए तुर्किये द्वारा भारत विरोधी रुख अपनाने पर नई दिल्ली ने बेहद सधे हुए और सख्त कदम उठाए। भारत ने तुर्किये के साथ कई व्यापारिक और रक्षा समझौतों को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इसके अलावा, भारत ने साइप्रस की संप्रभुता का खुलकर समर्थन किया, जो तुर्किये के लिए एक बड़ा कूटनीतिक झटका था (तुर्किये ने साइप्रस के एक हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है)।
भारत के इस कड़े रुख और आर्थिक रूप से दुनिया की चौथी सबसे बड़ी ताकत बनने की ओर अग्रसर होने के कारण तुर्किये को यह समझ आ गया है कि भारत जैसे विशाल बाजार और वैश्विक शक्ति की अनदेखी करना उसके खुद के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए नुकसानदेह है।
व्यापार और आर्थिक संबंधों को सुधारने की मजबूरी
तुर्किये इस समय गंभीर आर्थिक संकट और महंगाई से जूझ रहा है। ऐसे में वह भारत के साथ अपने व्यापारिक रिश्तों को बहाल करना चाहता है। तुर्किये के विदेश मंत्री ने भी संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की अपार संभावनाएं हैं। पाकिस्तान का साथ देने के चक्कर में भारत जैसे महाशक्ति को नाराज करना तुर्किये को भारी पड़ रहा था, यही वजह है कि अब वह ‘भाईजान’ की परवाह किए बिना भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहा है।


