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    नेटवर्क और गठजोड़ का किया पर्दाफाश, पेपर लीक मामले में CBI की चार्जशीट

    नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले की जांच कर रही केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली की विशेष अदालत में अपनी मुख्य चार्जशीट दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में सीबीआई ने पेपर लीक के पूरे नेटवर्क, मास्टरमाइंड्स, कोचिंग संचालकों और लाभार्थी छात्रों के गठजोड़ का पर्दाफाश किया है। जांच के दौरान एक रिहायशी सोसायटी के मोबाइल ऐप और होटल के एंट्री रजिस्टरों ने इस पूरे घोटाले की कड़ियों को जोड़ने में सबसे अहम सबूत की भूमिका निभाई है।

    ​सोसायटी ऐप और होटल से खुला राज

    ​सीबीआई की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने पेपर लीक की साजिश को अंजाम देने के लिए छात्रों को गुप्त स्थानों और होटलों में ठहराने का काम किया था।

    • सोसायटी ऐप डेटा से मिली डिजिटल लोकेशन: जांच एजेंसियों को पटना और अन्य शहरों की एक रिहायशी सोसायटी के रेजिडेंट/विज़िटर मैनेजमेंट ऐप (जैसे MyGate/NoBrokerHood) से संदिग्धों और छात्रों की आवाजाही का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड मिला। किस छात्र को किस समय और किस फ्लैट में लाया गया, इसका पूरा टाइमस्टैम्प इस ऐप के ज़रिए सत्यापित हुआ।
    • होटलों में छात्रों को उत्तर रटाने की व्यवस्था: चार्जशीट के मुताबिक, परीक्षा से ठीक एक रात पहले कई छात्रों को पटना और आसपास के होटलों में ठहराया गया था। वहां उन्हें लीक किए गए प्रश्नपत्र के उत्तर याद कराए गए। होटलों के सीसीटीवी फुटेज और रूम एंट्री रजिस्टरों से छात्रों व दलालों की मौजूदगी साबित हुई।

    ​13 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल

    ​सीबीआई ने इस मामले में कुल 13 मुख्य आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 की गंभीर धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल की है:

    • एनटीए के विषय विशेषज्ञ: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) से जुड़े तीन विषय विशेषज्ञों—मनीषा मंधारे (बायोलॉजी), प्रह्लाद विट्ठलराव कुलकर्णी (केमिस्ट्री) और मनीषा संजय हवलदार (फिजिक्स) को नामजद किया गया है।
    • कोचिंग संस्थान के संचालक और शिक्षक: लातूर स्थित आरसीसी कोचिंग इंस्टीट्यूट के मालिक शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर और पुणे स्थित कोचिंग संस्थान के फिजिक्स फैकल्टी तेजस हर्षद कुमार शाह की भूमिका उजागर हुई है।
    • दलाल और बिचौलिए: पर्चा लीक करने और इसे कोचिंग संस्थानों तथा छात्रों तक पहुंचाने वाले बिचौलियों (जैसे धनंजय लोखंडे, शुभम खैरनार, मांगीलाल बीवाल आदि) को भी नामजद कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया है।

    ​फॉरेंसिक और वैज्ञानिक साक्ष्य

    ​सीबीआई ने अदालत में पेश चार्जशीट में व्यापक दस्तावेजी व डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत किए हैं:

    • 360 गवाह और 422 दस्तावेज: एजेंसी ने 360 गवाहों के बयान, 422 महत्वपूर्ण दस्तावेज़ और 43 भौतिक साक्ष्य कोर्ट के समक्ष रखे हैं।
    • मनी ट्रेल और फॉरेंसिक रिपोर्ट: आरोपियों के कई बैंक खातों, लॉकरों और डीमैट खातों को फ्रीज किया गया है। इसके अलावा हैंडराइटिंग विशेषज्ञों, साइबर फॉरेंसिक रिपोर्ट और जले हुए प्रश्नपत्रों के टुकड़ों के वैज्ञानिक विश्लेषण से आरोपियों की संलिप्तता पूरी तरह पुख्ता हुई है।

    ​इस व्यापक जांच ने स्पष्ट कर दिया है कि किस तरह एक संगठित गिरोह ने परीक्षा प्रणाली को भेदने की कोशिश की थी, जिसे अब अदालत के समक्ष पूरी तरह बेनकाब कर दिया गया है।

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