पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर सोशल मीडिया पर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे संगठन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) को लेकर राजनीति के दिग्गजों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। तिरुवनंतपुरम से सांसद और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने इस आंदोलन और इसमें बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही ‘जेन जेड’ (Gen Z – युवा पीढ़ी) को लेकर एक खुला पत्र लिखा है। अपने इस पत्र में थरूर ने युवाओं के उत्साह की सराहना तो की है, लेकिन साथ ही उन्हें जमीनी हकीकत और चुनावी लोकतंत्र को लेकर एक बड़ी और व्यावहारिक नसीहत भी दी है।
युवाओं का गुस्सा जायज, लेकिन तरीका बदलना होगा: थरूर
शशि थरूर ने अपने पत्र में लिखा कि वह नीट (NEET), सीयूईटी (CUET) और अन्य परीक्षाओं में हो रही धांधलियों के खिलाफ युवाओं और छात्रों के गुस्से को पूरी तरह समझते हैं। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य दांव पर है और उनका विरोध पूरी तरह जायज है। हालांकि, थरूर ने चेतावनी देते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर दिखने वाला आक्रोश हमेशा वास्तविक बदलाव में नहीं बदलता। उन्होंने युवाओं को याद दिलाया कि डिजिटल एक्टिविज्म की अपनी एक सीमा होती है।
इंस्टाग्राम आपका मंच है, बैलट बॉक्स नहीं
युवाओं को सीधे संबोधित करते हुए शशि थरूर ने अपने पत्र में एक बेहद महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने लिखा,
“इंस्टाग्राम आपका टाउन स्क्वायर (मंच) हो सकता है, लेकिन यह बैलट बॉक्स (मतपेटी) नहीं है। रील बनाना, मीम्स शेयर करना और हैशटैग ट्रेंड कराना अपनी आवाज उठाने का एक बेहतरीन जरिया हो सकता है, लेकिन जब तक आप वोटिंग बूथ तक नहीं पहुंचेंगे और अपने वोट की ताकत का इस्तेमाल नहीं करेंगे, तब तक नीति निर्माताओं और व्यवस्था पर कोई वास्तविक दबाव नहीं बनेगा।”
थरूर ने ‘क्लिकटिविज़्म’ (सिर्फ क्लिक या लाइक करके आंदोलन का हिस्सा बनना) के खतरे से आगाह करते हुए कहा कि वास्तविक लोकतंत्र सड़कों पर उतरने और मतदान करने से चलता है, न कि सिर्फ स्मार्टफोन की स्क्रीन पर।
6 जून के प्रदर्शन से पहले थरूर का पत्र अहम
गौरतलब है कि कॉकरोच जनता पार्टी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक बड़े और शांतिपूर्ण प्रदर्शन का आह्वान किया है। इस प्रदर्शन से ठीक पहले शशि थरूर जैसे कद्दावर नेता का यह पत्र आना बेहद मायने रखता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि थरूरयुवाओं को केवल सोशल मीडिया तक सीमित न रहकर देश की मुख्यधारा की चुनावी राजनीति और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। अब देखना होगा कि 6 जून को जंतर-मंतर पर जेन जेड के इस ‘डिजिटल आक्रोश’ का कितना जमीनी असर देखने को मिलता है।


