मथुरा के वृंदावन में बन रहा चंद्रोदय मंदिर (Vrindavan Chandrodaya Mandir) अब अपने पूर्ण आकार में लगभग तैयार हो चुका है। इस्कॉन बैंगलोर द्वारा निर्मित यह मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा धार्मिक स्मारक बनने जा रहा है।
बुर्ज खलीफा और कुतुब मीनार से तुलना
- ऊंचाई: मंदिर की कुल ऊंचाई 210 मीटर (करीब 700 फीट) है। यह दिल्ली की कुतुब मीनार (73 मीटर) से लगभग तीन गुना ऊंचा है।
- नींव की गहराई: मंदिर की मजबूती के लिए इसकी नींव 55 मीटर गहरी रखी गई है। दिलचस्प बात यह है कि दुनिया की सबसे ऊंची इमारत, दुबई के बुर्ज खलीफा की नींव भी 50 मीटर गहरी है।
- ताजमहल का नजारा: मंदिर इतना ऊंचा है कि इसके सबसे ऊपरी तल पर लगे टेलीस्कोप से 80 किलोमीटर दूर आगरा के ताजमहल को देखा जा सकेगा।
लोकार्पण और शिलान्यास का इतिहास
- पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन: मंदिर प्रबंधन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लोकार्पण के लिए निमंत्रण भेजा है। संभावना जताई जा रही है कि 25 से 30 मई 2026 के बीच प्रधानमंत्री इसका उद्घाटन कर सकते हैं।
- अखिलेश यादव ने किया था शिलान्यास: इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास 16 मार्च 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने किया था। इसके बाद नवंबर 2014 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इसकी आधारशिला रखी थी।
मंदिर की विशेषताएं
- लागत और संरचना: लगभग 700 करोड़ रुपये की लागत से बना यह मंदिर 70 मंजिला है।
- भूकंपरोधी: इसे 7.5 तीव्रता तक के भूकंप को झेलने के लिए डिजाइन किया गया है।
- कृष्ण लीला थीम पार्क: मंदिर परिसर के चारों ओर 30 एकड़ में एक ‘थीम पार्क’ विकसित किया गया है, जिसमें द्वापर युग के 12 वनों (जैसे निधिवन, मधुवन) को पुनर्जीवित किया गया है।
- बहुआयामी सुविधाएं: परिसर में एक बड़ा कन्वेंशन हॉल, पार्किंग, हेलीपैड और अक्षय पात्र की विशाल रसोई भी शामिल है।
मंदिर के गर्भ गृह में चैतन्य महाप्रभु और राधा-कृष्ण के विग्रह स्थापित किए गए हैं। प्रधानमंत्री के आगमन की संभावना को देखते हुए प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने तैयारियां तेज कर दी हैं।


