भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं में एक और ऐतिहासिक अध्याय जोड़ते हुए 1 मई 2026 को ओडिशा के तट से Long-Range Anti-Ship Hypersonic Missile (LR-AShM) के फेज-2 का सफल परीक्षण किया है। DRDO द्वारा विकसित यह मिसाइल भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करती है जिनके पास हाइपरसोनिक मारक क्षमता है। इसे भारत का ‘ब्रह्मास्त्र’ कहा जा रहा है, और इसकी तुलना ब्रह्मोस और अग्नि-5 से करना इसकी अहमियत को और स्पष्ट करता है:
12,350 किमी/घंटा की विध्वंसक रफ्तार
इस मिसाइल की सबसे बड़ी ताकत इसकी गति है। यह Mach 10 की अधिकतम रफ्तार (लगभग 12,350 किमी/घंटा) हासिल कर सकती है।
- ब्रह्मोस बनाम LR-AShM: जहां ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक मिसाइल है जिसकी रफ्तार करीब Mach 3 है, वहीं यह नई हाइपरसोनिक मिसाइल उससे तीन गुना ज्यादा तेज है। इतनी अधिक रफ्तार का मतलब है कि दुश्मन के रडार और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को संभलने का मौका भी नहीं मिलेगा।
- काइनेटिक एनर्जी: हाइपरसोनिक गति पर मिसाइल की मारक क्षमता केवल उसके वारहेड (धमाके) पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसकी काइनेटिक एनर्जी (गतिज ऊर्जा) ही इतनी प्रचंड होती है कि यह किसी भी बड़े युद्धपोत या एयरक्राफ्ट कैरियर के लोहे के कवच को कागज की तरह चीर सकती है।
1500 किमी तक सटीक तबाही
फेज-2 के इस सफल परीक्षण में मिसाइल ने 1500 किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्य को सटीकता से भेदा।
- सी-डिनायल (Sea Denial): यह मिसाइल विशेष रूप से नौसेना के लिए ‘कैरियर किलर’ के रूप में तैयार की गई है। 1500 किमी की रेंज का अर्थ है कि भारतीय नौसेना अपनी सीमा में रहकर भी दुश्मन के जहाजों को गहरे समुद्र में नष्ट कर सकती है।
अग्नि-5 से कैसे है अलग?
अग्नि-5 एक इंटरकांटिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसका मुख्य काम परमाणु हथियार ले जाना और लंबी दूरी (5000+ किमी) तक रणनीतिक बढ़त बनाना है।
- मैन्युवरेबिलिटी (गतिशीलता): अग्नि-5 एक निश्चित परवलयिक पथ (Parabolic Path) पर चलती है, जिसे ट्रैक करना आसान होता है। इसके विपरीत, LR-AShM एक ‘हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल’ है। यह वायुमंडल में अपनी दिशा बदल सकती है और जिगजैग (Zig-zag) तरीके से चल सकती है, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव हो जाता है।
तकनीकी विशेषताएँ
- टू-स्टेज प्रोपल्शन: इसमें दो चरणों वाला ठोस ईंधन रॉकेट मोटर लगा है। पहला चरण इसे रफ्तार देता है और दूसरा चरण इसे हाइपरसोनिक गति तक ले जाता है।
- स्वदेशी तकनीक: इस मिसाइल में भारत में निर्मित एवियोनिक्स और हाई-एक्यूरेसी सेंसर पैकेज का इस्तेमाल किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और भविष्य की युद्ध तैयारियों के दृष्टिकोण से यह परीक्षण एक मील का पत्थर है। ब्रह्मोस ने हमें सुपरसोनिक युग में बादशाहत दिलाई थी, और अब LR-AShM ने भारत को हाइपरसोनिक युग का ‘गेम चेंजर’ बना दिया है।


