सीबीआई (CBI) ने एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय सफलता हासिल करते हुए बैंकिंग धोखाधड़ी के आरोपी भगोड़े कमलेश पारेख को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत प्रत्यर्पित (Extradite) कराने में कामयाबी हासिल की है। 1 मई 2026 को उन्हें दिल्ली लाया गया, जहां सीबीआई की ‘बैंक सुरक्षा और धोखाधड़ी शाखा’ (BSFB) ने उन्हें अपनी कस्टडी में ले लिया।
इस मामले के मुख्य विवरण इस प्रकार हैं:
धोखाधड़ी का मामला
कमलेश पारेख कोलकाता स्थित प्रसिद्ध आभूषण कंपनी ‘श्री गणेश ज्वेलरी हाउस’ के प्रमोटरों में से एक हैं। उन पर और उनके सहयोगियों पर आरोप है कि उन्होंने भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के नेतृत्व वाले 25 बैंकों के कंसोर्टियम (समूह) के साथ 2,223 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की है।
- पैसे की हेराफेरी: आरोपियों ने बैंकों से ऋण लिया और उस राशि को विदेशी संस्थाओं (Hong Kong, Singapore, UAE) के एक नेटवर्क के माध्यम से डायवर्ट कर दिया।
- फर्जी लेनदेन: जांच के अनुसार, कंपनी ने फर्जी व्यापारिक गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन में हेरफेर करके बैंकों को सैकड़ों करोड़ों का चूना लगाया।
प्रत्यर्पण की प्रक्रिया
- रेड नोटिस: कमलेश पारेख लंबे समय से दुबई में रह रहे थे। उनके खिलाफ इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस जारी किया गया था।
- UAE के साथ तालमेल: भारत सरकार (MEA और MHA) की ओर से किए गए अनुरोध के बाद, यूएई अधिकारियों ने उन्हें हिरासत में लिया। कानूनी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद, उन्हें भारतीय अधिकारियों को सौंप दिया गया।
पृष्ठभूमि
यह मामला 2016 से चल रहा है। कमलेश पारेख के भाई नीलेश पारेख को 2017 में मुंबई एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था, जबकि कमलेश तभी से विदेश में छिपे थे। सीबीआई के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए अब तक 150 से अधिक भगोड़ों को भारत वापस लाया जा चुका है।
कमलेश पारेख की गिरफ्तारी से इस बड़े बैंक घोटाले की जांच में महत्वपूर्ण खुलासे होने की उम्मीद है। अब उन्हें कोलकाता की विशेष सीबीआई अदालत में पेश किया जाएगा।


