ईरान और अमेरिका के बीच समुद्र में चल रही ‘लुका-छिपी’ के बीच तेहरान ने वाशिंगटन को एक बड़ा रणनीतिक झटका दिया है। अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकेबंदी और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) के बावजूद, ईरान का एक विशालकाय सुपर टैंकर ‘HUGE’ करीब 1,900 करोड़ रुपये (लगभग $220 मिलियन) का कच्चा तेल लेकर सुरक्षित निकलने में कामयाब रहा है।
कैसे दी अमेरिकी नौसेना को मात?
- डार्क एक्टिविटी (Dark Activity): ट्रैकिंग फर्म ‘TankerTrackers.com’ के अनुसार, सुपर टैंकर ‘HUGE’ (IMO: 9357183) ने पकड़े जाने से बचने के लिए 20 मार्च से ही अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर रखा था। इसे आखिरी बार श्रीलंका के तट के पास देखा गया था।
- रणनीतिक रास्ता: यह टैंकर होर्मुज की कड़ी नाकेबंदी को चकमा देते हुए दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर निकल गया। वर्तमान में इसके इंडोनेशिया के लोम्बोक जलडमरूमध्य (Lombok Strait) से होकर रियाऊ द्वीप समूह की ओर बढ़ने की खबर है।
- बड़ी खेप: इस ‘वेरी लार्ज क्रूड कैरियर’ (VLCC) में 19 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल लदा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के दौर में ईरान के लिए यह एक बड़ी आर्थिक जीत मानी जा रही है।
अमेरिका के दावे पर सवाल
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पेंटागन ने होर्मुज में “100% अचूक नाकेबंदी” का दावा किया था। अमेरिका ने दावा किया था कि उसने अब तक 42 से अधिक ईरानी जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर किया है। हालांकि, ईरान का कहना है कि उसके कम से कम 52 जहाज इस नाकेबंदी को सफलतापूर्वक तोड़ चुके हैं। अमेरिका ने चेतावनी दी थी कि जो भी कंपनी सुरक्षित मार्ग के लिए ईरान को ‘टोल’ या सुरक्षा शुल्क देगी, उस पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
आर्थिक और वैश्विक प्रभाव
- तेल की कीमतों में उछाल: होर्मुज में जारी इस तनाव और नाकेबंदी के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 126 डॉलर प्रति बैरल के रिकॉर्ड स्तर को छू चुकी हैं।
- भारत का रुख: जहां दुनिया इस संकट से जूझ रही है, वहीं ईरान ने स्पष्ट किया है कि भारत जैसे मित्र देशों के जहाज इस रास्ते से सुरक्षित गुजर सकते हैं।
सुपर टैंकर ‘HUGE’ का सुरक्षित निकल जाना यह दर्शाता है कि अमेरिकी तकनीक और सैन्य घेराबंदी के बावजूद, ईरान अपनी अर्थव्यवस्था की रीढ़ यानी तेल निर्यात को चालू रखने के लिए जोखिम भरे लेकिन सफल रास्ते निकाल रहा है। यह घटना आगामी शांति वार्ताओं में ईरान के हाथ मजबूत कर सकती है।


