MP के जबलपुर के बरगी बांध (Bargi Dam) के गहरे पानी में बड़ा हादसा हो गया। 35 जांबाज मजदूरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना ‘देवदूत’ बनकर 12 लोगों की जान बचाई। यह घटना तब हुई जब सैलानियों से भरा एक क्रूज अचानक डूबने लगा। बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 9 हो गई है। रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान गोताखोरों ने 5 और शव बरामद किए हैं। शुरुआती रिपोर्ट में क्षमता से अधिक सवारी और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को हादसे की मुख्य वजह माना जा रहा है। मुख्यमंत्री ने घटना पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को सहायता राशि देने का निर्देश दिया है।
अब तक 9 शव निकाले जा चुके हैं, जबकि 6 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए SDRF और होमगार्ड की टीमें लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय मजदूरों और बचाव दल ने 22 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया था, जिनका उपचार जारी है।
कैसे हुआ हादसा?
जबलपुर के प्रसिद्ध बरगी बांध में ‘मैकल रिजॉर्ट’ का एक क्रूज सैलानियों को लेकर सैर पर निकला था। अचानक तकनीकी खराबी या संतुलन बिगड़ने के कारण क्रूज में पानी भरने लगा और वह डूबने लगा। क्रूज पर सवार लोग चीखने-पुल्लाने लगे और देखते ही देखते वहां मौत का मंजर मंडराने लगा।
जल जीवन मिशन के 35 मजदूर बने ‘मसीहा’
हादसे के वक्त पास ही जल जीवन मिशन के तहत निर्माण कार्य चल रहा था, जहां करीब 35 मजदूर काम कर रहे थे।
- बिना ट्रेनिंग के छलांग: क्रूज को डूबता देख इन मजदूरों ने एक पल की भी देरी नहीं की। इनके पास न तो कोई लाइफ जैकेट थी और न ही रेस्क्यू का कोई औपचारिक प्रशिक्षण।
- पानी में कूदे: ये मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर उफनते पानी में कूद गए। उन्होंने एक मानवीय श्रृंखला बनाई और डूब रहे लोगों तक पहुंचे।
- 12 लोगों को बचाया: इन जांबाजों ने एक-एक कर क्रूज पर फंसे 12 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यदि ये मजदूर समय पर न पहुंचते, तो यह एक बड़ी त्रासदी में बदल सकता था।
प्रशासन ने किया सम्मान का ऐलान
मजदूरों की इस निस्वार्थ वीरता की खबर फैलते ही पूरे जिले में उनकी चर्चा होने लगी। जबलपुर कलेक्टर ने इन सभी 35 मजदूरों की बहादुरी की सराहना की है। प्रशासन ने ऐलान किया है कि इन सभी मजदूरों को उनकी वीरता के लिए उचित पुरस्कार और सम्मान दिया जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भी इस साहसिक कार्य की जानकारी दी गई है।
सुरक्षा पर उठे सवाल
हादसे ने पर्यटन विभाग और क्रूज संचालकों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर तकनीकी लापरवाही ने लोगों की जान खतरे में डाली, वहीं इन ‘श्रमवीरों’ ने साबित कर दिया कि इंसानियत और बहादुरी किसी प्रशिक्षण की मोहताज नहीं होती। आज ये 35 मजदूर पूरे जबलपुर के लिए असली हीरो बन गए हैं।


