यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा पास करना लाखों युवाओं का सपना होता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे होते हैं जो न केवल इस कठिन परीक्षा को पास करते हैं, बल्कि सफलता के नए प्रतिमान स्थापित करते हैं। गरिमा अग्रवाल की कहानी भी ऐसी ही है, जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत और दृढ़ इच्छाशक्ति से यह साबित कर दिया कि भाषा या पृष्ठभूमि कभी भी आपकी उड़ान में बाधा नहीं बन सकती।
हिंदी मीडियम से शुरुआत और शिक्षा
गरिमा मध्य प्रदेश के खरगोन जिले की रहने वाली हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा एक हिंदी मीडियम स्कूल से हुई। अक्सर यह माना जाता है कि हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए तकनीकी शिक्षा या यूपीएससी जैसी परीक्षाएं कठिन होती हैं, लेकिन गरिमा ने इस धारणा को गलत साबित किया। उन्होंने स्कूली शिक्षा के बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।
विदेश की शानदार नौकरी को कहा ‘अलविदा’
इंजीनियरिंग के बाद गरिमा का चयन एक मल्टीनेशनल कंपनी में हो गया और उन्हें विदेश में काम करने का मौका मिला। उन्हें वहां लाखों का पैकेज मिल रहा था, लेकिन उनका मन देश सेवा में लगा था।
- अंदरूनी आवाज: गरिमा ने महसूस किया कि विदेश में काम करके वे केवल व्यक्तिगत समृद्धि पा सकती हैं, लेकिन समाज में बदलाव लाने के लिए उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में जाना होगा।
- बड़ा फैसला: उन्होंने अपनी हाई-प्रोफाइल विदेशी नौकरी छोड़ दी और भारत वापस आकर यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं।
दो बार क्रैक की UPSC परीक्षा
गरिमा की सफलता की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने एक बार नहीं, बल्कि दो बार इस प्रतिष्ठित परीक्षा को पास किया।
- पहली सफलता (IPS): साल 2017 में अपने पहले ही प्रयास में गरिमा ने यूपीएससी परीक्षा क्रैक की और उन्हें IPS (भारतीय पुलिस सेवा) कैडर मिला।
- दूसरी सफलता (IAS): आईपीएस की ट्रेनिंग के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। वे अपने ‘IAS’ बनने के सपने को पूरा करना चाहती थीं। 2018 में अपने दूसरे प्रयास में उन्होंने 40वीं रैंक हासिल की और आखिरकार आईएएस अधिकारी बन गईं।
गरिमा के सफलता के मंत्र
गरिमा अग्रवाल उन उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा हैं जो संसाधनों की कमी या भाषा को अपनी कमजोरी मानते हैं। उनकी सफलता के पीछे कुछ प्रमुख बातें रहीं:
- बेसिक्स पर पकड़: उन्होंने एनसीईआरटी (NCERT) की किताबों और अखबारों (द हिंदू/इंडियन एक्सप्रेस) पर विशेष ध्यान दिया।
- आंसर राइटिंग: उन्होंने उत्तर लेखन का निरंतर अभ्यास किया, जिससे उन्हें मुख्य परीक्षा (Mains) में अच्छे अंक मिले।
- आत्मविश्वास: हिंदी माध्यम से होने के बावजूद उन्होंने कभी इसे अपनी कमी नहीं बनने दिया।
गरिमा अग्रवाल की कहानी सिखाती है कि सफलता केवल बड़े शहरों या अंग्रेजी माध्यम तक सीमित नहीं है। यदि आपके पास जुनून है और आप अपनी जड़ों से जुड़े रहकर मेहनत करते हैं, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको लक्ष्य तक पहुंचने से नहीं रोक सकती। आज वे कई युवाओं के लिए एक ‘रोल मॉडल’ हैं।


