भारत में नीट (NEET) पेपर लीक, परीक्षा धांधली और युवाओं के मुद्दों को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और छात्र संगठनों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों की कवरेज पाकिस्तानी मीडिया में चौबीसों घंटे प्रमुखता से दिखाई जा रही है। पाकिस्तानी न्यूज चैनल (जैसे ‘जियो न्यूज’ और अखबार ‘डॉन’) नई दिल्ली के जंतर-मंतर और संसद भवन के आसपास चल रहे इन प्रदर्शनों को केंद्र सरकार और पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ विपक्ष के लिए एक बड़े राजनीतिक मौके के रूप में पेश कर रहे हैं। हालांकि, पाकिस्तानी मीडिया के इस रवैये पर अब खुद पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
पाकिस्तानी एक्सपर्ट्स का सवाल: दोहरा रवैया क्यों?
पाकिस्तान की चर्चित पत्रकार और एक्सपर्ट कुर्रत-उल-ऐन शिराज़ी समेत कई विश्लेषकों ने अपनी ही मीडिया की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने पूछा कि जब पाकिस्तानी मीडिया भारत में लोकतंत्र के तहत हो रहे छात्र प्रदर्शनों की पल-पल की खबरें दिखा रहा है, तो वह पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में महीनों से जारी भीषण जनआंदोलन और मानवाधिकार उल्लंघनों पर पूरी तरह चुप क्यों है?
विशेषज्ञों का कहना है:“पाकिस्तानी मीडिया भारत में छात्रों के प्रदर्शन को बढ़ा-चढ़ाकर लोकतंत्र की नाकामी के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अपने ही देश द्वारा अवैध रूप से कब्जे में रखे गए PoK के रावलकोट, मीरपुर और मुजफ्फराबाद में हो रहे भीषण विद्रोह और सेना की बर्बरता पर मीडिया को सांप सूंघ गया है। यह पूरी तरह से दोहरा मापदंड है।”
PoK में सेना की नाकेबंदी और मानवाधिकार संकट
रिपोर्ट्स के अनुसार, PoK (विशेषकर रावलकोट और आसपास के इलाकों) में पिछले कई महीनों से जॉइंट आवामी एक्शन कमेटी (JAAC) की अगुवाई में भारी विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। वहां की जनता पाकिस्तान सरकार और जनरल असीम मुनीर की अगुवाई वाली पाकिस्तानी सेना के खिलाफ सड़क पर उतरी हुई है।
- आजादी और बुनियादी अधिकारों की मांग: PoK के लोग भारी महंगाई, बिजली संकट, भोजन की किल्लत और दमनकारी नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान से पूर्ण आजादी तक के नारे लगाए हैं।
- सेना का जुल्म और नाकेबंदी: प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना ने PoK की नाकेबंदी कर रखी है और जरूरी रसद-सामान की आपूर्ति रोक दी है। हालिया हिंसा और सेना द्वारा की गई गोलीबारी में दर्जनों स्थानीय नागरिकों की मौत हो चुकी है और 1,000 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
भारतीय लोकतंत्र बनाम पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा
विश्लेषकों का मानना है कि इस्लामाबाद अपने आंतरिक संकटों, PoK में बिगड़ते हालात और आर्थिक तंगहाली से अपने देश की जनता का ध्यान भटकाने के लिए भारतीय मीडिया और प्रदर्शनों का सहारा ले रहा है। जहां भारत में छात्र अपनी मांगों को लेकर पारदर्शी तरीके से विरोध दर्ज करा रहे हैं और अदालत से लेकर संसद तक इस पर बहस हो रही है, वहीं PoK में अपने हक की आवाज उठाने वालों पर गोलियां बरसाई जा रही हैं। इसके बावजूद पाकिस्तानी मीडिया अपने खुद के गृहयुद्ध जैसे हालात छुपाकर भारत विरोधी प्रोपेगैंडा फैलाने में जुटा हुआ है।


