ईरान-इजरायल के बीच बढ़ते तनाव और युद्ध की आहट के बीच भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर जनता में चिंता बढ़ गई है। सोशल मीडिया और विपक्षी दलों की ओर से दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिस पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपना रुख साफ किया है।
बीजेपी का स्पष्टीकरण: क्या दाम बढ़ेंगे?
बीजेपी के आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने हाल ही में ‘एक्स’ (X) पर पोस्ट के जरिए विपक्ष के दावों को ‘भ्रामक सूचना अभियान’ (Misinformation Campaign) करार दिया है।
- घबराने की जरूरत नहीं: बीजेपी ने कहा है कि विपक्ष युद्ध का हवाला देकर जनता के बीच दहशत फैला रहा है, जबकि कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी की फिलहाल कोई संभावना नहीं है।
- सरकार की तैयारी: सरकार का दावा है कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने पिछले 10 वर्षों में एक ऐसा ऊर्जा ढांचा तैयार किया है, जो वैश्विक अस्थिरता के बावजूद आम आदमी को सुरक्षित रखने में सक्षम है।
भारत की नई रणनीति: ‘त्रिकोणीय दुविधा’ का समाधान
अमित मालवीय ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अपनाई गई नई रणनीति का भी जिक्र किया है, जो मुख्य रूप से तीन स्तंभों पर आधारित है:
- उपलब्धता (Availability): भारत ने अपने तेल आयात के स्रोतों को विविध (Diversified) बनाया है। अब हम केवल मिडिल ईस्ट पर निर्भर नहीं हैं; रूस और अन्य देशों से भी भारी मात्रा में कच्चा तेल खरीदा जा रहा है।
- किफायती दाम (Affordability): सरकार का लक्ष्य है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू बाजार में कीमतें स्थिर बनी रहें।
- स्थिरता (Sustainability): भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया गया है।
भारत के पास कितना स्टॉक है?
सरकारी सूत्रों के अनुसार, भारत ने किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त बैकअप प्लान तैयार रखा है:
होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से केवल 40% तेल आता है, जबकि बाकी 60% तेल के लिए भारत रूस और अन्य सुरक्षित समुद्री रास्तों का उपयोग कर रहा है।
भारत के पास फिलहाल 25 दिनों का कच्चा तेल और 25 दिनों के पेट्रोल-डीजल का स्टॉक मौजूद है।
कुल मिलाकर देश के पास लगभग 8 हफ्तों का पेट्रोलियम भंडार है।


