भारतीय राजनीति के नक्शे पर एक बार फिर ‘भगवा’ लहर अपनी चरम सीमा पर दिखाई दे रही है। हालिया चुनावी नतीजों और राजनीतिक समीकरणों के विश्लेषण के बाद, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले एनडीए ने एक नया ऐतिहासिक कीर्तिमान स्थापित किया है।
ऐतिहासिक विस्तार: 2018 का रिकॉर्ड ध्वस्त
4 मई, 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश की 76 फीसदी आबादी और 72% भौगोलिक क्षेत्रफल पर अब भाजपा और उसके सहयोगी दलों का शासन है। इससे पहले भाजपा के शिखर का दौर मार्च 2018 में माना जाता था, जब देश के 21 राज्यों में एनडीए की सरकारें थीं। हालांकि, उस समय जनसंख्या और क्षेत्रफल का यह प्रतिशत वर्तमान के मुकाबले कम था। 2018 में भाजपा का शासन लगभग 71% क्षेत्रफल और 68% आबादी तक सीमित था, जिसे अब पार कर लिया गया है।
राज्यवार शक्ति प्रदर्शन (मई 2026)
हालिया विधानसभा चुनावों के परिणामों ने भाजपा की इस बढ़त में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है:
- उत्तर भारत का वर्चस्व: उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और हरियाणा जैसे राज्यों में भाजपा की पकड़ न केवल बरकरार है, बल्कि वोट शेयर में भी भारी वृद्धि देखी गई है।
- पश्चिम बंगाल में बड़ा उलटफेर: 2026 के विधानसभा चुनाव के नतीजों में पश्चिम बंगाल में भाजपा ने 294 में से 206 सीटें जीतकर ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाई है, जो इस विस्तार का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।
- पूर्वोत्तर और दक्षिण: असम में भाजपा ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर अपनी जड़ें और मजबूत की हैं। हालांकि केरल और तमिलनाडु में गठबंधन की चुनौतियां बरकरार हैं, लेकिन एनडीए के कुल राज्यों की संख्या अब 21 (राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों सहित) तक पहुंच गई है।
इस सफलता के पीछे के मुख्य कारक
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘सुपर-रिकॉर्ड’ के पीछे तीन प्रमुख स्तंभ रहे हैं:
- लाभार्थी राजनीति: सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ (DBT) जनता तक पहुँचने से एक नया वफादार वोट बैंक तैयार हुआ है।
- सांगठिक मजबूती: चुनावी बूथ स्तर पर भाजपा की माइक्रो-मैनेजमेंट रणनीति ने विपक्ष को पछाड़ने में मदद की।
- विपक्ष का बिखराव: ‘इंडिया’ (I.N.D.I.A.) गठबंधन के भीतर आपसी कलह और सीटों के बंटवारे में देरी का सीधा फायदा एनडीए को मिला।
क्षेत्रफल बनाम जनसंख्या का गणित
क्षेत्रफल के लिहाज से राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों पर नियंत्रण के कारण 72% का आंकड़ा पार हुआ है, वहीं उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे घनी आबादी वाले राज्यों में सत्ता होने के कारण 76% आबादी अब भगवा ध्वज के अधीन है। यह आंकड़ा भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास में किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक अद्वितीय उपलब्धि है।
यह विस्तार न केवल आगामी नीतिगत निर्णयों को प्रभावित करेगा, बल्कि राज्यसभा में भी भाजपा की स्थिति को और अधिक मजबूत करेगा, जिससे बड़े विधायी बदलावों का मार्ग प्रशस्त होगा।


