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    LeT ने पहली बार स्वीकारा, भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शीर्ष कमांडरों को मारा

    भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और सामरिक जीत के रूप में, प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसके शीर्ष कमांडरों को मार गिराया है। पाकिस्तान के कई शहरों में लगे पोस्टर इस बात की तस्दीक कर रहे हैं कि भारत की ‘प्रिसिजन स्ट्राइक’ ने आतंकी बुनियादी ढांचे को गहरी चोट पहुँचाई है।

    ​लश्कर का कबूलनामा और पोस्टर राजनीति

    ​ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, पाकिस्तान के साहीवाल और कसूर जैसे इलाकों में लश्कर-ए-तैयबा की स्थानीय इकाइयों ने आधिकारिक पोस्टर चस्पा किए हैं। इन पोस्टरों में उन आतंकियों की तस्वीरें और नाम शामिल हैं जो मई 2025 में भारतीय सेना की कार्रवाई में मारे गए थे।

    पोस्टर में शामिल मुख्य बातें:

    • शीर्ष कमांडरों की मौत: लश्कर ने माना कि उसके मुख्यालय ‘मरकज-ए-तैयबा’ (मुरीदके) को भारी नुकसान पहुँचाया गया।
    • श्रद्धांजलि सभा का आयोजन: आतंकियों को ‘शहीद’ बताकर उनके लिए सार्वजनिक प्रार्थना सभाओं के आयोजन की बात कही गई है।
    • पाकिस्तान सरकार की चुप्पी: जहाँ एक ओर पाकिस्तानी सेना और सरकार इन मौतों को दबाने की कोशिश कर रही थी, वहीं लश्कर के इन पोस्टरों ने इस्लामाबाद के झूठ की पोल खोल दी है।

    ​क्या था ‘ऑपरेशन सिंदूर’?

    ​7 मई, 2025 की रात को भारतीय सशस्त्र बलों ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान और PoK में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले (Precision Strikes) किए थे।

    ऑपरेशन की मुख्य उपलब्धियां:

    1. मुरीदके हेडक्वार्टर पर हमला: लश्कर-ए-तैयबा का सबसे सुरक्षित माना जाने वाला केंद्र पूरी तरह तबाह कर दिया गया।
    2. प्रमुख आतंकियों का खात्मा: इसमें मुदस्सर खादियान, अबू जंदाल और जैश-ए-मोहम्मद के मसूद अजहर के करीबी रिश्तेदारों सहित लगभग 100 से अधिक आतंकी मारे गए थे।
    3. स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल: इस ऑपरेशन में ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित निगरानी प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर उपयोग किया गया था।

    ​वैश्विक और स्थानीय प्रभाव

    ​लश्कर द्वारा सरेआम अपनी हार स्वीकार करना यह दर्शाता है कि अब वे पाकिस्तान सरकार के नियंत्रण से बाहर होकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तानी नागरिक भी अब अपनी सरकार से सवाल पूछ रहे हैं कि वैश्विक स्तर पर प्रतिबंधित संगठन उनकी नाक के नीचे इस तरह खुलेआम पोस्टर कैसे लगा रहे हैं।

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