जिंदगी कई बार ऐसे इम्तिहान लेती है जहाँ धैर्य की सीमा खत्म होने लगती है। हरियाणा के जींद जिले के एक छोटे से गांव गिल्लू खेड़ा के रहने वाले विकास कुंडू की कहानी कुछ ऐसी ही है। यूपीएससी परीक्षा 2025 के नतीजों में विकास ने ऑल इंडिया रैंक 27 हासिल कर न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है।+1
संघर्षों से भरा सफर: 5 बार मिली असफलता
विकास की यह सफलता कोई रातों-रात मिली उपलब्धि नहीं है। इसके पीछे वर्षों का कड़ा परिश्रम और बार-बार मिली हार को सहने की शक्ति छिपी है। विकास अपने पहले दो प्रयासों में तो ‘प्रीलिम्स’ की दहलीज भी पार नहीं कर पाए थे। कुल 5 बार असफल होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। साल 2024 में उन्होंने 288वीं रैंक हासिल की थी, लेकिन उनका लक्ष्य IAS बनना था। अपने छठे और आखिरी प्रयास में विकास ने अपनी कमियों को सुधारा और सीधे टॉप-30 में जगह बनाई।
विकास कुंडू की सफलता की रणनीति (Strategy)
विकास ने अपनी तैयारी के दौरान कुछ खास बातों पर ध्यान केंद्रित किया, जो अन्य उम्मीदवारों के लिए प्रेरणादायक हो सकते हैं:
- मेंटरशिप और सही मार्गदर्शन: विकास का मानना है कि इस परीक्षा में केवल कड़ी मेहनत काफी नहीं है, बल्कि सही दिशा में मेहनत करना जरूरी है। उन्होंने अनुभवी मेंटरों से सलाह ली और अपनी गलतियों का विश्लेषण किया।
- टेस्ट सीरीज का महत्व: उन्होंने प्रीलिम्स और मेंस दोनों के लिए व्यवस्थित टेस्ट सीरीज को अपनी सफलता का आधार बताया। इससे उन्हें समय प्रबंधन और परीक्षा के पैटर्न को समझने में मदद मिली।
- ग्रामीण परिवेश को नहीं बनने दिया बाधा: विकास के पिता एक साधारण किसान हैं। घर में कोई बड़ा डिग्रीधारी नहीं था, फिर भी उन्होंने जींद के डीएवी स्कूल से शुरुआती पढ़ाई के बाद दिल्ली आकर अपनी तैयारी को धार दी।
- मेंस आंसर राइटिंग: 2024 की तुलना में उन्होंने अपनी उत्तर लेखन शैली (Answer Writing) में सुधार किया, जिससे उन्हें 2025 में बेहतर अंक मिले।
प्रेरणा का स्रोत
विकास की मां, निर्मला देवी और पिता, कर्ण सिंह बताते हैं कि उन्हें अपने बेटे की मेहनत पर पूरा भरोसा था। जब 5 बार परिणाम सकारात्मक नहीं रहा, तब भी परिवार ने उन पर दबाव नहीं बनाया।
“विकास की कहानी सिखाती है कि यदि आपके पास स्पष्ट लक्ष्य और अटूट संकल्प है, तो असफलताएं केवल एक पड़ाव हैं, मंजिल नहीं।”
हरियाणा के इस लाल ने साबित कर दिया कि एक किसान का बेटा भी अपनी मेहनत के दम पर देश की सर्वोच्च प्रशासनिक सेवा के शीर्ष तक पहुँच सकता है। उनके गांव में अब जश्न का माहौल है और युवाओं के लिए विकास एक नए रोल मॉडल बनकर उभरे हैं।


