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    ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को किया खारिज, होर्मुज पर फिर मंडराने लगा खतरा

    अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ताज़ा घटनाक्रम में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्धविराम (Ceasefire) के लिए ईरान द्वारा भेजे गए जवाब को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। ट्रंप ने इसे ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ (Totally Unacceptable) करार दिया है, जिससे खाड़ी क्षेत्र में शांति की उम्मीदों को गहरा झटका लगा है।

    ट्रंप का कड़ा रुख और वार्ता की विफलता

    ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव पर अपना औपचारिक जवाब भेजा था। इस जवाब में ईरान ने स्थायी युद्धविराम, प्रतिबंधों को हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से नौसैनिक घेराबंदी खत्म करने की मांग की थी। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान पिछले 50 वर्षों से दुनिया के साथ ‘खेल’ रहा है और अब यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि जब तक ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों को पूरी तरह बंद नहीं करता और अपने समृद्ध यूरेनियम (Enriched Uranium) के भंडार को बाहर नहीं निकालता, तब तक कोई समझौता संभव नहीं है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर संकट

    इस कूटनीतिक विफलता के बाद दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा मंडराने लगा है। ईरान ने इस मार्ग पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और चेतावनी दी है कि यदि उसके जहाजों पर हमला हुआ, तो वह अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भारी प्रहार करेगा। वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% इसी मार्ग से गुजरता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने की आशंका बढ़ गई है।

    इजरायल और क्षेत्रीय तनाव

    इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ट्रंप के रुख का समर्थन किया है। नेतन्याहू ने कहा कि जब तक ईरान के भीतर परमाणु सामग्री मौजूद है, तब तक युद्ध खत्म नहीं माना जा सकता। उन्होंने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ, तो सैन्य कार्रवाई के जरिए इन परमाणु केंद्रों को नष्ट किया जा सकता है।

    ड्रोन हमलों से बढ़ी असुरक्षा

    शांति वार्ता के बीच ही कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पास वाणिज्यिक जहाजों पर संदिग्ध ड्रोन हमले हुए हैं। UAE ने दो ड्रोनों को मार गिराने का दावा किया और इसका आरोप ईरान पर लगाया है। इन घटनाओं ने पहले से ही नाजुक चल रहे युद्धविराम को और कमजोर कर दिया है।

    वर्तमान स्थिति को देखते हुए खाड़ी क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा बढ़ गया है। अमेरिका जहां सैन्य विकल्प खुले रखने की बात कर रहा है, वहीं ईरान भी ‘पूर्ण तैयारी’ का दावा कर रहा है। यदि आने वाले दिनों में कोई कूटनीतिक समाधान नहीं निकलता, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए इसके परिणाम विनाशकारी हो सकते हैं।

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