नीट-यूजी (NEET-UG) पेपर लीक मामले को लेकर देश भर में हुए छात्र आंदोलनों के दौरान हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि जिन छात्रों या नाबालिगों का कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख आदेश और टिप्पणियां
- बिना आपराधिक रिकॉर्ड वाले छात्रों की रिहाई: शीर्ष अदालत ने राज्यों व पुलिस प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए ऐसे सभी छात्रों को तुरंत छोड़ा जाए, जिनका कोई आपराधिक इतिहास नहीं है।
- शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार: सुनवाई के दौरान पीठ ने दोहराया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन लोकतंत्र का संवैधानिक अधिकार है। केवल प्रदर्शन होने के आधार पर पुलिस बल प्रयोग या अत्यधिक सख्त रवैये को न्यायसंगत नहीं ठहराया जा सकता।
- डिजिटल डेटा सुरक्षित रखने के निर्देश: अदालत ने पुलिस प्रशासन को आदेश दिया कि प्रदर्शनकारियों से जुड़ा सारा डिजिटल डेटा (सीसीटीवी फुटेज व वीडियो) सुरक्षित रखा जाए और उसे सार्वजनिक न किया जाए।
- SIT व हाई पावर कमेटी के संकेत: पुलिस द्वारा किए गए कथित लाठीचार्ज, पैलेट गन के इस्तेमाल, और महिलाओं व पत्रकारों से मारपीट के आरोपों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच टीम (SIT) या हाई पावर कमेटी गठित करने के संकेत दिए हैं।
दोनों पक्षों की सुरक्षा पर कोर्ट का जोर
अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच में केवल पुलिस की कार्रवाई ही नहीं, बल्कि प्रदर्शन के दौरान घायल हुए लगभग 250 पुलिसकर्मियों से जुड़ी घटनाओं की भी निष्पक्ष पड़ताल होगी। कोर्ट यह भी जांच करेगा कि क्या शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन में असामाजिक या बाहरी तत्वों ने घुसपैठ कर हिंसा भड़काई थी।
पृष्ठभूमि: यह मामला 20 जुलाई को संसद मार्ग की ओर निकाले गए मार्च से जुड़ा है, जहां प्रदर्शनकारी छात्रों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी झड़प हुई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में पुलिस बर्बरता के खिलाफ याचिकाएं दायर की गई थीं।


