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    ‘हुंकार’ रिव्यू: धर्मगुरु का यौन शोषण और संघर्ष, अनीत पड्डा और फातिमा सना शेख का है दमदार रोल

    ओटीटी पर अपराध, सत्ता और प्रभावशाली लोगों के खिलाफ न्याय की लड़ाई पर कई कहानियां आ चुकी हैं। इसी कड़ी में अनीत पड्डा, फातिमा सना शेख, रघुबीर यादव और मोहम्मद जीशान अय्यूब की वेब सीरीज ‘हुंकार: द रोअर’ 25 सितंबर से JioHotstar पर स्ट्रीम हो रही है। नित्या मेहरा और करण कपाड़िया के निर्देशन में बनी छह एपिसोड की यह सीरीज एक नाबालिग लड़की के उस संघर्ष को सामने लाती है, जो एक प्रभावशाली धर्मगुरु पर यौन शोषण का आरोप लगाने के बाद शुरू होता है।

    क्या है ‘हुंकार’ की कहानी?

    कहानी मध्य प्रदेश के एक प्रभावशाली धर्मगुरु सुनील चौकसी उर्फ बापजी के इर्द-गिर्द घूमती है। अनीत पड्डा ने 17 वर्षीय मीनू रावत का किरदार निभाया है, जो बापजी पर दुष्कर्म का आरोप लगाती है। आरोप सामने आते ही मामला सिर्फ पुलिस और अदालत तक सीमित नहीं रहता। मीनू और उसके परिवार को सामाजिक दबाव और विरोध का सामना करना पड़ता है। वहीं, फातिमा सना शेख नई-नई नियुक्त एसीपी जसलीन सिंह की भूमिका में हैं। वह मामले की जांच करते हुए मीनू के पक्ष को समझने और उसे न्याय दिलाने की कोशिश करती हैं। पत्रकार अमिताभ सिन्हा और वकील भालेराव भी इस लड़ाई में मीनू के साथ खड़े दिखाई देते हैं।

    कहानी का मुद्दा मजबूत, लेकिन लेखन कमजोर

    ‘हुंकार’ की सबसे बड़ी ताकत इसका विषय है। सीरीज सिर्फ अपराध की जांच तक नहीं रुकती, बल्कि यह भी दिखाने की कोशिश करती है कि यौन उत्पीड़न का आरोप सामने आने के बाद समाज किस तरह पीड़िता से ही सवाल करने लगता है। उसके कपड़े, व्यवहार और निजी जिंदगी तक को बहस का हिस्सा बना दिया जाता है।

    कोर्टरूम वाले हिस्से में सीरीज ज्यादा प्रभावी नजर आती है। हालांकि, समीक्षाओं में पटकथा को इसकी कमजोर कड़ी बताया गया है। कुछ किरदारों को पर्याप्त गहराई नहीं मिलती और कई कहानी के धागे पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। यही वजह है कि मजबूत शुरुआत के बावजूद सीरीज का प्रभाव हर एपिसोड में एक जैसा नहीं रहता।

    अनीत और फातिमा ने संभाला मोर्चा

    अभिनय की बात करें तो अनीत पड्डा ने मीनू के किरदार में खास प्रभाव छोड़ा है। डर, गुस्सा, असमंजस और अपने लिए खड़े होने का भाव उनके अभिनय में नजर आता है। खासकर कोर्टरूम में उनका प्रदर्शन कहानी को भावनात्मक मजबूती देता है। नवभारत टाइम्स के रिव्यू में भी उनके अंतिम मोनोलॉग को प्रभावशाली बताया गया है।

    फातिमा सना शेख ने एसीपी जसलीन के किरदार को संयम के साथ निभाया है। वह पुलिस अधिकारी को किसी अति-नाटकीय ‘हीरो’ की तरह पेश करने के बजाय शांत और नियंत्रित अंदाज में नजर आती हैं। रघुबीर यादव बतौर बापजी प्रभाव छोड़ते हैं, जबकि जीशान अय्यूब और राम कपूर कोर्टरूम हिस्सों को मजबूती देते हैं।

    देखें या नहीं?

    ‘हुंकार: द रोअर’ का विषय गंभीर और समकालीन है। अनीत पड्डा और फातिमा सना शेख की परफॉर्मेंस इसे संभालती है, लेकिन असमान पटकथा और कुछ अधूरे किरदार इसकी रफ्तार और असर को सीमित करते हैं। अगर आपको कोर्टरूम ड्रामा और सामाजिक मुद्दों पर आधारित क्राइम-थ्रिलर पसंद हैं, तो यह सीरीज एक विकल्प हो सकती है। इसे 3/5 की रेटिंग दी है।

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