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    Success Story: IPS आशना चौधरी ने बिना कोचिंग क्रैक की सिविल सेवा परीक्षा

    संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है। इसे पास करने के लिए जहां देश भर के लाखों छात्र सालों-साल महंगे कोचिंग संस्थानों के चक्कर काटते हैं, वहीं उत्तर प्रदेश की आशना चौधरी ने बिना किसी कोचिंग की मदद के (Self-Study) अपने तीसरे प्रयास में यह मुकाम हासिल कर खुद को साबित किया है. आइए जानते हैं उनकी इस प्रेरणादायक सफलता की कहानी।

    शुरुआती शिक्षा और पारिवारिक पृष्ठभूमि

    आशना चौधरी मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले की रहने वाली हैं। उनकी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई गाजियाबाद और हापुड़ से हुई. स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के प्रतिष्ठित लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर विमेन से अंग्रेजी ऑनर्स में स्नातक (Graduation) की डिग्री पूरी की. इसके बाद उन्होंने साउथ एशियन यूनिवर्सिटी से इंटरनेशनल रिलेशंस (अंतरराष्ट्रीय संबंध) में मास्टर डिग्री हासिल की।

    शिक्षा पूरी करने के बाद, आशना ने सिविल सेवा के माध्यम से समाज सेवा करने की ठानी और यूपीएससी की तैयारी में जुट गईं।

    शुरुआती दो असफलताओं से नहीं हारीं हिम्मत

    आशना की यूपीएससी की राह इतनी आसान नहीं थी. उन्होंने साल 2020 में अपना पहला प्रयास दिया. इस पहले प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा (Prelims) भी पास नहीं कर पाईं। इसके बाद उन्होंने साल 2021 में दूसरा प्रयास किया, लेकिन इस बार भी वह केवल कुछ अंकों से प्रिलिम्स स्टेज पर ही बाहर हो गईं। लगातार दो बार मिली इस असफलता से निराश होने के बजाय, आशना ने अपनी कमियों का बारीकी से विश्लेषण किया और अपनी रणनीति में सुधार किया।

    तीसरे प्रयास में 116वीं रैंक के साथ बनीं IPS

    साल 2022 में आशना चौधरी ने दोगुनी मेहनत के साथ अपना तीसरा प्रयास दिया. उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई और उन्होंने न सिर्फ परीक्षा पास की, बल्कि ऑल इंडिया 116वीं रैंक (AIR-116) हासिल कर अपना नाम टॉपर्स की सूची में दर्ज कराया. इस शानदार रैंक के आधार पर उन्हें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चुना गया.

    आशना चौधरी की सफलता के मूल मंत्र

    बिना किसी कोचिंग के घर पर ही तैयारी कर सफलता पाने वाली आशना ने अपनी रणनीति के कुछ प्रमुख बिंदु साझा किए हैं।

    • आत्मविश्वास और धैर्य: दो बार असफल होने के बाद भी उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा और अपनी कमियों को दूर करने के लिए लगातार मेहनत करती रहीं।
    • एनसीईआरटी और बेसिक्स पर ध्यान: उन्होंने कोचिंग के भारी-भरकम नोट्स के बजाय बुनियादी किताबों (NCERT) और सेल्फ-स्टडी को अपनी तैयारी का मुख्य आधार बनाया।
    • मॉक टेस्ट और रिवीज़न: आशना के अनुसार, यूपीएससी में सफलता के लिए केवल पढ़ना काफी नहीं है, बल्कि पढ़ी हुई चीजों का बार-बार रिवीज़न करना और नियमित रूप से मॉक टेस्ट देना बेहद जरूरी है।

    आशना चौधरी की यह कहानी देश के उन तमाम सिविल सेवा अभ्यर्थियों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो महंगी कोचिंग के बिना इस परीक्षा को पास करने का सपना देखते हैं.

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