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    राज्यसभा में बहुमत के बेहद करीब NDA, जानें देश की राजनीति पर क्या होगा असर?

    राज्यसभा (Rajya Sabha) में केंद्र की सत्तारूढ़ एनडीए (NDA) गठबंधन दो-तिहाई बहुमत के बेहद करीब पहुंचती नजर आ रही है। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मची बड़ी बगावत के बाद संसद के उच्च सदन में एनडीए का आंकड़ा 163 के जादुई आंकड़े को छू सकता है। हालांकि, लोकसभा में संख्या बल में उस अनुपात में बड़ी वृद्धि होने की उम्मीद नहीं है। आइए इस पूरे संसदीय समीकरण और इसके बड़े सियासी मायनों को विस्तार से समझते हैं:

    राज्यसभा का समीकरण: कैसे 163 तक पहुंचेगा NDA?

    राज्यसभा में किसी भी महत्वपूर्ण संविधान संशोधन विधेयक (Constitutional Amendment Bill) को पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 163 सीटों की आवश्यकता होती है।

    • मौजूदा स्थिति और बढ़त: एनडीए की मौजूदा ताकत करीब 148 सांसदों की है। झारखंड और मिजोरम में होने वाले राज्यसभा चुनावों में निर्दलीय सीटों पर जीत दर्ज कर एनडीए इस आंकड़े को 151 तक ले जाएगा।
    • TMC बगावत का असर: तृणमूल कांग्रेस के तीन राज्यसभा सांसदों के इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल में होने वाले उपचुनावों में ये तीनों सीटें एनडीए के खाते में जाना तय माना जा रहा है। इससे यह आंकड़ा बढ़कर 154 हो जाएगा।
    • 163 का टारगेट: राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, टीएमसी के कुछ और सांसदों के पाला बदलने या इस्तीफा देने की संभावना है। अगर ऐसा होता है, तो एनडीए आसानी से 163 का आंकड़ा छू लेगा, जिससे सरकार बिना किसी क्षेत्रीय दल (जैसे YSRCP या BJD) की मदद के अपने दम पर संविधान संशोधन बिल पास करा सकेगी।

    नवंबर की चुनौती: हालांकि एनडीए की यह बढ़त स्थाई नहीं रहने वाली है। नवंबर 2026 में उत्तर प्रदेश से 10 राज्यसभा सांसद रिटायर हो रहे हैं। यूपी विधानसभा में समाजवादी पार्टी (SP) की बढ़ी हुई ताकत के कारण वहां एनडीए को कुछ सीटों का नुकसान झेलना पड़ सकता है।

    लोकसभा में क्यों नहीं बढ़ेगा बड़ा संख्या बल?

    जहां एक तरफ राज्यसभा में एनडीए दो-तिहाई बहुमत की ओर बढ़ रहा है, वहीं लोकसभा (Lower House) में कहानी थोड़ी अलग है। लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 363 सीटों की आवश्यकता होती है, जिससे एनडीए अभी भी काफी दूर है।

    • अलग गुट का निर्माण: टीएमसी के करीब 20 लोकसभा बागी सांसदों ने पार्टी से अलग होकर एक स्वतंत्र गुट बनाने और एनडीए को बाहर से समर्थन देने का फैसला किया है।
    • अयोग्यता से बचाव: चूंकि बागी सांसदों की संख्या लोकसभा में टीएमसी की कुल ताकत (28 सांसद) के दो-तिहाई से अधिक है, इसलिए उन पर दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) लागू नहीं होगा।

    इस फेरबदल का देश की राजनीति पर क्या असर होगा?

    इस नए संख्या बल का सीधा असर मोदी सरकार के आगामी विधायी एजेंडे पर पड़ेगा:

    • अटके बिलों को मिलेगी रफ्तार: सरकार अब परिसीमन (Delimitation Package) और ‘एक देश, एक चुनाव’ (One Nation, One Election) जैसे बड़े और कड़े नीतिगत बदलावों से जुड़े संविधान संशोधन विधेयकों को राज्यसभा में आसानी से आगे बढ़ा सकेगी।
    • विपक्ष (INDIA Bloc) को झटका: डीएमके (DMK) के 8 सांसदों के बाहर होने और आम आदमी पार्टी (AAP) के दूरी बना लेने के बाद विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के पास राज्यसभा में केवल 64 सांसद बचे हैं, जिससे उच्च सदन में सरकार को घेरने की उनकी क्षमता काफी कमजोर हो गई है।
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