नई दिल्ली में स्वाइन फ्लू यानी एच1एन1 संक्रमण के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इस साल अब तक राजधानी में 1,770 से अधिक मामलों की पुष्टि हो चुकी है। एक ही दिन में 114 नए मरीज सामने आने के बाद कुल आंकड़ा 1,777 तक पहुंच गया। 6 अगस्त तक 1,344 मामले दर्ज थे, यानी महज 14 दिनों में 433 नए मरीज बढ़े हैं। पिछले साल इसी अवधि में केवल 229 मामले थे, जिससे इस बार संक्रमण में करीब आठ गुना बढ़ोतरी देखी जा रही है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने स्थिति की समीक्षा के लिए बैठक की है। सरकारी अस्पतालों को पर्याप्त इलाज व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं। संक्रमण के पैटर्न, प्रभावित इलाकों और संभावित हॉटस्पॉट पर निगरानी बढ़ाई जा रही है। स्वाइन फ्लू मरीजों के लिए अलग वार्ड तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
मानसून के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव और उमस के कारण मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामले भी बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार बुजुर्ग, छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं और पहले से फेफड़े, हृदय या मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। इन समूहों में फ्लू का संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।
इन लक्षणों पर तुरंत ध्यान दें
एच1एन1 संक्रमण में आमतौर पर तेज बुखार, लगातार खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, बदन दर्द और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक रहने वाली खांसी और तेज बुखार को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ लोगों में सांस से जुड़ी परेशानी भी बढ़ सकती है, इसलिए गंभीर या बिगड़ते लक्षणों की स्थिति में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
बचाव के लिए नियमित रूप से हाथ धोना, बीमार होने पर घर पर आराम करना और दूसरों के बहुत करीब जाने से बचना उपयोगी उपाय हैं। जरूरत और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार फ्लू टीकाकरण पर भी विचार किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है, लेकिन बढ़ते मामलों के बीच व्यक्तिगत सावधानी और समय पर चिकित्सा सलाह सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।


