जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास और घाटी में उनकी दोबारा बसावट की कोशिशों के बीच आतंकी धमकी का नया मामला सामने आया है। यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल (ULC) नाम के संगठन की ओर से जारी कथित धमकी भरे पत्र में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों और उनके लिए बनाए जा रहे सरकारी ट्रांजिट आवासों को निशाना बनाने की चेतावनी दी गई है। पत्र सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और इसकी प्रामाणिकता की जांच की जा रही है।
ट्रांजिट कॉलोनियों को बताया निशाना
धमकी भरे पत्र में घाटी में तैयार की जा रही सरकारी ट्रांजिट कॉलोनियों को लेकर आपत्तिजनक दावे किए गए हैं। संगठन ने इन आवासीय परियोजनाओं की तुलना इजरायली बस्तियों से करते हुए इन्हें कथित तौर पर कश्मीर विरोधी गतिविधियों का केंद्र बताया। पत्र में प्रधानमंत्री पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी गई है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि संगठन ने दावा किया है कि उसके पास कर्मचारियों और उनके परिवारों से जुड़ी आवासीय जानकारी मौजूद है। पत्र के साथ जम्मू-कश्मीर प्रशासन के पीडब्ल्यूडी और मंडलीय आयुक्त कार्यालय से जुड़े कुछ आधिकारिक पत्राचार की प्रतियां भी लगाए जाने की बात सामने आई है। इनमें जेवन समेत अलग-अलग स्थानों पर बनाए जा रहे ट्रांजिट आवासों के हैंडओवर और सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित जानकारी होने का दावा किया गया है।
डेटा आतंकियों तक पहुंचने का सवाल
इस घटनाक्रम ने सुरक्षा के साथ-साथ संवेदनशील सरकारी जानकारी के संभावित दुरुपयोग का सवाल भी खड़ा कर दिया है। कश्मीरी पंडित कर्मचारियों से जुड़े एक्टिविस्टों ने पूछा है कि यदि धमकी पत्र में दी गई जानकारी वास्तविक है, तो कर्मचारियों के नाम, आवास और दूसरी सूचनाएं आतंकी नेटवर्क तक कैसे पहुंचीं।
सुरक्षा एजेंसियां अब वायरल पत्र की सत्यता और उसके स्रोत की जांच कर रही हैं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं किसी सरकारी या अन्य डिजिटल रिकॉर्ड से संवेदनशील जानकारी लीक तो नहीं हुई।
पहले भी मिल चुकी हैं धमकियां
यह पहली बार नहीं है जब घाटी में काम कर रहे कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को धमकी दी गई हो। हाल के दिनों में ULC के नाम से कई कथित धमकी पत्र सामने आए हैं। इनमें प्रधानमंत्री पैकेज के तहत कार्यरत कर्मचारियों को निशाना बनाने और नौकरी छोड़ने जैसी धमकियों का दावा किया गया है। कुछ मामलों में कर्मचारियों की निजी जानकारी सार्वजनिक किए जाने की बात भी सामने आई है।
इन घटनाओं ने उन कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है, जो सरकारी रोजगार के जरिए घाटी में लौटकर सामान्य जीवन स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।
सुरक्षित आवास की मांग तेज
धमकियों के बीच कश्मीरी पंडित कर्मचारी लंबे समय से सुरक्षित ट्रांजिट आवास उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। हाल ही में कर्मचारियों ने श्रीनगर के प्रेस एन्क्लेव में प्रदर्शन करते हुए सरकार को 30 सितंबर तक का समय दिया था। उनका कहना है कि यदि तब तक तैयार आवासों का कब्जा नहीं मिला तो वे 1 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के पुनर्वास और सुरक्षित आवास की मांग पूरी करना, दूसरी ओर आतंकियों की धमकियों के बीच उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना।
1990 के विस्थापन की यादें फिर ताजा
कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा का सवाल 1990 के दशक के विस्थापन से जुड़ा हुआ है। उस दौर में आतंकवाद और लक्षित हिंसा के कारण बड़ी संख्या में कश्मीरी पंडितों को घाटी छोड़नी पड़ी थी। इसके बाद केंद्र और जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने रोजगार तथा पुनर्वास योजनाओं के जरिए समुदाय की घाटी में वापसी को प्रोत्साहित किया।
ऐसे में मौजूदा धमकियां केवल कर्मचारियों की सुरक्षा का मामला नहीं हैं, बल्कि घाटी में पुनर्वास की पूरी प्रक्रिया के लिए भी बड़ी चुनौती मानी जा रही हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां धमकी पत्र की जांच कर रही हैं और कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।


