संसद का मानसून सत्र अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया है। सत्र की समाप्ति के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पूरे सत्र का लेखा-जोखा देश के सामने रखा। उन्होंने बताया कि लगातार हंगामे और व्यवधान के बावजूद सरकार ने अपने कई विधायी कार्यों को पूरा किया है।
सत्र के कामकाज का ब्योरा
किरेन रिजिजू ने मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों की उत्पादकता और विधायी कार्य का आंकड़ा साझा किया:
- सदन की उत्पादकता: सत्र के दौरान लोकसभा में लगभग 31 से 39 प्रतिशत कामकाज हुआ।
- विधेयकों का पारित होना: हंगामे के बीच संसद के दोनों सदनों से महत्वपूर्ण विधेयक पारित कराए गए। लोकसभा में 14 विधेयक पेश किए गए, जिनमें से 11 से 12 महत्वपूर्ण बिल पारित किए गए।
- सरकारी कामकाज की सफलता: रिजिजू ने कहा कि सरकार के नजरिए से सत्र शत-प्रतिशत सफल रहा, क्योंकि देश हित से जुड़े कई जरूरी बिल पास कराए गए।
विपक्ष पर साधा निशाना
संसदीय कार्य मंत्री ने सत्र के दौरान हुए व्यवधान और हंगामे के लिए सीधे तौर पर विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया: उन्होंने कहा कि सरकार हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार थी, लेकिन विपक्ष ने नियम-कायदों को दरकिनार कर केवल हंगामा किया और चर्चा में भाग नहीं लिया। रिजिजू ने कहा कि विपक्ष के अड़ियल रवैये और शोर-शराबे की वजह से कई नए और पहली बार चुनकर आए सांसदों को बोलने का मौका नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि विरोध व्यक्त करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन संसद की कार्यवाही को पूरी तरह ठप करना और गतिरोध पैदा करना अलोकतांत्रिक है।
महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी हंगामा
किरेन रिजिजू ने अफसोस जताया कि विपक्ष के रवैये के कारण राष्ट्रीय महत्व की उपलब्धियों पर भी सदन में सामान्य चर्चा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि सरकार देश के विकास और सुरक्षा से जुड़े विधायी कार्यों को रोकने नहीं दे सकती, इसलिए हंगामे के बीच भी जनता के हित में बिल पास कराए गए।


