मेघालय की राजनीति में बुधवार को बड़ा सियासी बदलाव देखने को मिला। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के आठ मौजूदा विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में सभी विधायकों ने भाजपा की सदस्यता ली। इस बदलाव के बाद 60 सदस्यीय मेघालय विधानसभा में भाजपा की संख्या 2 से बढ़कर 10 हो गई है।
कौन-कौन से विधायक भाजपा में आए?
भाजपा में शामिल होने वाले आठ विधायकों में लहकमन रिंबुई, पियुस मारवीन, किर्मेन शायला, मायरेलबोर्न सिएम, मैथ्यू कुरबाह, ओलान सिंह सुइन, बालाजीड कुफार सिनरेम और सिनशार लिंगदोह थाबाह शामिल हैं। ये सभी UDP के मौजूदा विधायक थे। आठ विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद UDP की विधानसभा में संख्या 12 से घटकर चार रह गई है।
इस घटनाक्रम के साथ भाजपा अब मेघालय विधानसभा में NPP के बाद दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की अगुआई वाली सरकार में NPP के 33 विधायक हैं। भाजपा और UDP दोनों ही अब तक सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा रहे हैं।
सरकार के बहुमत पर नहीं पड़ेगा तत्काल असर
आठ विधायकों के भाजपा में जाने से सत्तारूढ़ सरकार के बहुमत पर तत्काल कोई संकट नहीं दिखता। NPP के पास अकेले ही 33 विधायक हैं, यानी 60 सदस्यीय सदन में बहुमत के लिए जरूरी 31 से अधिक संख्या उसके पास है। इसलिए इस बदलाव का तत्काल असर सरकार गिरने के बजाय सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर शक्ति संतुलन पर पड़ सकता है।
भाजपा की विधानसभा में संख्या बढ़ने के बाद सरकार में उसके प्रतिनिधित्व और भविष्य की राजनीतिक भूमिका को लेकर चर्चा तेज हो सकती है। वहीं UDP के सामने अब अपने बचे चार विधायकों के साथ क्षेत्रीय राजनीतिक पहचान बनाए रखने की चुनौती होगी।
कोयला खनन और खासी भाषा समेत कई मुद्दे
भाजपा में शामिल होने से पहले इन विधायकों की ओर से कुछ स्थानीय मुद्दों को लेकर केंद्र से आश्वासन मांगे जाने की बात सामने आई थी। इनमें कानूनी कोयला खनन फिर शुरू करना, खासी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करना, Meghalaya Residents Safety and Security Act (MRSSA) को लागू करना और थेम इव मावलोंग की हरिजन कॉलोनी के पुनर्वास जैसे मुद्दे शामिल हैं।
रिजिजू ने विधायकों के भाजपा में शामिल होने का स्वागत करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर और मेघालय में पिछले वर्षों में हुए विकास से वे प्रभावित हुए हैं। यह उनका राजनीतिक आकलन है, जबकि विधायकों की ओर से स्थानीय मुद्दों और केंद्र से मिले आश्वासनों को भी इस फैसले से जोड़ा गया है।
2028 के चुनाव से पहले अहम बदलाव
मेघालय में अगला विधानसभा चुनाव 2028 में होना है। ऐसे में चुनाव से करीब डेढ़ साल पहले आठ विधायकों का एक साथ दल बदलना राज्य के राजनीतिक समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब भाजपा के सामने इन नए विधायकों के साथ अपने संगठन को मजबूत करने और उठाए गए स्थानीय मुद्दों पर आगे बढ़ने की चुनौती होगी। वहीं UDP को अपने राजनीतिक आधार और संगठन को दोबारा मजबूत करना होगा।


