देशभर में NEET पेपर लीक और परीक्षा में धांधली को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन के बीच वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे भी आंदोलन के समर्थन में आ गए हैं। अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर (अहमदनगर) में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समक्ष 2 घंटे का ‘मौन आंदोलन’ किया। इससे पहले उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई और हिंसा पर गहरा दुख व्यक्त किया तथा सरकार को संवाद का रास्ता अपनाने की सलाह दी।
पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी: ‘जनता की आवाज मत दबाइए’
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने खत में अन्ना हजारे ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिसिया बल प्रयोग और हिंसा की खबरें अत्यंत वेदनादायक हैं।
- लोकतंत्र में दमन गलत: उन्होंने लिखा, “लोकतंत्र में असंतोष को दबाने के बजाय संवादात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। छात्रों के आक्रोश को केवल कानून-व्यवस्था की समस्या न मानकर समाज की पीड़ा और अपेक्षाओं के रूप में देखा जाना चाहिए।”
- जवाबदेही से नहीं गिरती सरकार: अन्ना ने पत्र में लिखा कि जब परीक्षा में धांधली या घपले उजागर होते हैं, तो सारा दोष निचले स्तर के कर्मचारियों पर मढ़ दिया जाता है और श्रेय शीर्ष नेतृत्व लेता है। उन्होंने कहा कि किसी जिम्मेदार विभाग के मंत्री का इस्तीफा लेने से सरकार नहीं गिरती, बल्कि इससे प्रशासनिक जवाबदेही तय होती है।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर कही ये बात
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग का अप्रत्यक्ष लेकिन स्पष्ट समर्थन करते हुए अन्ना हजारे ने कहा:
“यदि सरकार जवाबदेही तय करते हुए संबंधित विभाग के मंत्री (धर्मेंद्र प्रधान) का इस्तीफा लेती है, तो इससे सरकार की सत्ता नहीं चली जाएगी। इसके विपरीत, यह अन्य मंत्रियों के लिए एक कड़ा संदेश होगा कि यदि वे अपने विभागों का सही ढंग से संचालन नहीं करेंगे तो उन्हें भी पद छोड़ना पड़ेगा।”
छात्रों के भविष्य और आत्महत्याओं पर जताई चिंता
अन्ना हजारे ने देश में बढ़ रही छात्र आत्महत्याओं और बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि 2024 के बाद इस वर्ष भी लाखों छात्र परीक्षा व्यवस्था में धांधली और पेपर लीक के कारण मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं। निराशा में कई युवाओं ने आत्मघाती कदम उठाए हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की है कि सत्याग्रह और लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करते हुए छात्रों से तुरंत सीधा संवाद शुरू किया जाए और उनकी मांगों का सकारात्मक समाधान निकाला जाए।


