INDIA ब्लॉक (विपक्ष) के 23 राजनीतिक दलों और 1 निर्दलीय सांसद (कपिल सिब्बल) ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत को एक संयुक्त पत्र भेजा है। इस पत्र में भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की विशेष गहन समीक्षा यानी एसआईआर (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया और चुनाव से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है। यह कदम विपक्षी दलों के साझा एजेंडे ‘SURE’ (Solidarity, Unity and REsistance – एकजुटता, एकता और प्रतिरोध) के तहत उठाया गया है।
CJI को लिखे पत्र के मुख्य बिंदु
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने इस पत्र की पुष्टि करते हुए बताया कि विपक्ष ने मुख्य न्यायाधीश से मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें और शिकायतें की हैं:
- वोटर लिस्ट में हेरफेर का आरोप: विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव आयोग की ‘विशेष गहन समीक्षा’ (SIR) प्रक्रिया के कारण लाखों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काटे जा रहे हैं। इससे नागरिकों के मौलिक वोटिंग अधिकार छीने जा रहे हैं।
- चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल: पत्र में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली, उसकी निष्पक्षता और चुनावों के दौरान कथित ‘वोट लूट’ या ‘चुनावी हेराफेरी’ को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।
- न्यायपालिका से हस्तक्षेप की मांग: विपक्ष ने मुख्य न्यायाधीश से इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने और देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था व संविधान की रक्षा के लिए हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया है।
कैसे तैयार हुई इसकी रूपरेखा?
इस संयुक्त पत्र को भेजने का निर्णय 8 जून 2026 को आयोजित ‘INDIA जनबंधन’ की बैठक में लिया गया था। इस बैठक में शुरुआत में 21 राजनीतिक दल और एक निर्दलीय सांसद शामिल थे। हालांकि, बाद में परदे के पीछे चली लंबी बातचीत के बाद दो अन्य प्रमुख दलों को भी इसके लिए राजी कर लिया गया, जिसके बाद कुल हस्ताक्षरकर्ताओं की संख्या 23 दलों तक पहुंच गई।
क्या हैं इसके राजनीतिक मायने?
इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले प्रमुख नेताओं में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव और संजय राउत शामिल हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आम आदमी पार्टी (AAP) और डीएमके (DMK), जो पहले INDIA ब्लॉक से अपनी राहें अलग कर चुके थे, उन्होंने भी इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।
विपक्षी नेताओं का कहना है कि भले ही अलग-अलग राज्यों के चुनावों में पार्टियां आपस में मुकाबला कर रही हों, लेकिन जब बात संविधान की रक्षा, केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग और चुनावी निष्पक्षता की आती है, तो पूरा विपक्ष एकजुट होकर चुनौती देने के लिए तैयार है।


