संसद में गूंजा UPI पर टैक्स का मुद्दा: ‘डिजिटल इंडिया के नाम पर आम जनता और छोटे कारोबारियों पर बोझ’ – राज्यसभा में बोले संजय सिंह
राज्यसभा में ‘कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026’ पर चर्चा के दौरान आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने सरकार के डिजिटल इंडिया के दावों और यूपीआई (UPI) पेमेंट्स पर संभावित टैक्स व मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) से जुड़े प्रावधानों को लेकर तीखे सवाल उठाए।
संजय सिंह के भाषण के मुख्य बिंदु:
- डिजिटल इंडिया पर सवाल: संजय सिंह ने कहा कि सरकार ने पहले तो देश के आम नागरिकों, रेहड़ी-पटरी वालों, छोटे दुकानदारों और ऑटो चालकों को डिजिटल पेमेंट और UPI अपनाने के लिए प्रेरित किया। लेकिन अब जब देश की बड़ी आबादी इस पर निर्भर हो चुकी है, तो टैक्स और चार्ज लगाने की तैयारी की जा रही है।
- आम जनता पर असर: उन्होंने आरोप लगाया कि अगर छोटे व्यापारियों या डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ डाला जाएगा, तो इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर पड़ेगा। व्यापारी इस खर्च की भरपाई उपभोक्ताओं से ही करेंगे।
- विदेशी कंपनियों को फायदा? AAP सांसद ने दावा किया कि वीजा (Visa) और मास्टरकार्ड (Mastercard) जैसी विदेशी कंपनियों के भारत में घटते कारोबार के दबाव में यह कदम उठाया जा रहा है, ताकि डिजिटल लेनदेन पर शुल्क लागू कर विदेशी हित साधे जा सकें।
- दोहरे रवैये पर तंज: उन्होंने कहा कि एक तरफ बड़े विदेशी निवेशकों और उद्योगपतियों को तरह-तरह की टैक्स छूट और राहत दी जाती है, वहीं दूसरी ओर देश के छोटे व्यापारियों और मध्यम वर्ग से पाई-पाई वसूलने की नीतियां बनाई जा रही हैं।
सरकार का स्पष्टीकरण
राज्यसभा में बहस का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संजय सिंह और विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि विधेयक में किया जा रहा संशोधन केवल एक सक्षम प्रावधान (Enabling Provision) है और सरकार का छोटे व्यापारियों या आम ग्राहकों पर UPI लेनदेन हेतु कोई भी MDR या अतिरिक्त टैक्स लगाने का इरादा नहीं है।


