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    पूर्व वित्त सचिव पर भड़के सांसद निशिकांत, मानहानि का किया मुकदमा, इस दावे पर विवाद?

    भाजपा सांसद निशिकांत दुबे और पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बीच विवाद अब कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है। दुबे ने गर्ग के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मुकदमा दायर करने की बात कही है। विवाद की शुरुआत गर्ग के उस दावे से हुई, जिसमें उन्होंने एक पॉडकास्ट में कहा था कि वित्त सचिव रहते हुए निशिकांत दुबे उनसे उनके कार्यालय में मिले थे और कुछ काम कराने के लिए संपर्क किया था। दुबे ने इस दावे को सिरे से खारिज किया है।

    बैठक के दावे पर भड़के दुबे

    निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि वह 2009 में सांसद बनने के बाद से भारत सरकार के किसी कार्यालय में नहीं गए। उन्होंने प्रोटोकॉल का हवाला देते हुए कहा कि केंद्र सरकार में सचिव का पद सांसद से नीचे होता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने कभी किसी अधिकारी के तबादले या पोस्टिंग के लिए पत्र नहीं लिखा।

    दुबे ने गर्ग को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास उनकी किसी चिट्ठी या कार्यालय में हुई बैठक की जानकारी है तो उसे सार्वजनिक करें। इसी दौरान उन्होंने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए कहा कि ऐसा साबित होने पर वह गर्ग को ‘असली मर्द का बेटा’ मानेंगे। दुबे ने यह भी कहा कि गर्ग के खिलाफ उन्होंने आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज कराया है।

    गर्ग ने क्या आरोप लगाया था?

    सुभाष गर्ग ने एक पॉडकास्ट में दावा किया था कि निशिकांत दुबे उनके कार्यालय आए थे और एक मामले में हस्तक्षेप करने के लिए उनसे कहा था। गर्ग के अनुसार, उन्होंने उस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया क्योंकि संबंधित मामला उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं था। उन्होंने दुबे पर कंपनियों से जुड़े मामलों में लॉबिंग करने के आरोप भी लगाए थे। ये गर्ग के आरोप हैं, जिन्हें दुबे ने खारिज किया है।

    दुबे का कहना है कि जिस समय की बात गर्ग कर रहे हैं, उस दौरान वह संसद की प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कर संबंधी समिति के अध्यक्ष थे और समिति के अध्यक्ष के तौर पर अधिकारियों को बुलाने का अधिकार रखते थे। उन्होंने कहा कि वह गर्ग के दावे को सार्वजनिक रूप से चुनौती देंगे।

    GDP के आंकड़ों से फिर गरमाया विवाद

    दोनों के बीच यह विवाद ऐसे समय में सामने आया जब सुभाष गर्ग ने सरकार की ओर से जारी पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि दर के आंकड़ों पर सवाल उठाए थे। गर्ग ने तर्क दिया कि मौजूदा और पुराने आधार आंकड़ों में बदलाव के कारण विकास दर की तुलना सही तरीके से नहीं की जा सकती। दूसरी ओर, सरकारी पक्ष ने 7.8 प्रतिशत की वृद्धि को वास्तविक उत्पादन आंकड़ों पर आधारित बताया है।

    2018 की चिट्ठी भी आई चर्चा में

    गर्ग की टिप्पणी के बाद निशिकांत दुबे ने मार्च 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखी अपनी पुरानी चिट्ठी भी साझा की। उस समय गर्ग आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव थे। दुबे ने पत्र में उनके आर्थिक नीति संबंधी दृष्टिकोण की समीक्षा की मांग की थी और अधिक सार्वजनिक निवेश की जरूरत पर जोर दिया था।

    अब मानहानि की कानूनी कार्रवाई के बाद दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप और बढ़ गए हैं। मामले में आगे अदालत की कार्यवाही से यह स्पष्ट होगा कि दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के समर्थन में क्या साक्ष्य पेश करते हैं।

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