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    एशियन गेम्स 2026 की उलटी गिनती शुरू, गंभीर और अय्यर की होगी अग्नि परीक्षा

    जापान में होने वाले एशियन गेम्स 2026 (19 सितंबर से 4 अक्टूबर) की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। भारतीय पुरुष क्रिकेट टीम को वहां अपने गोल्ड मेडल की रक्षा करने उतरना है। लेकिन हाल ही में आयरलैंड दौरे पर मिली 2-0 की करारी हार (आयरलैंड ने दोनों टी-20 मैच जीते) ने टीम इंडिया की तैयारियों की पोल खोल दी है। अब मुख्य कोच गौतम गंभीर और नए टी-20 कप्तान श्रेयस अय्यर के पास टीम की खामियों को दुरुस्त करने के लिए लगभग ढाई महीने का वक्त है।

    एशियन गेम्स से पहले भारत को खेलने हैं इतने T20I

    एशियन गेम्स में उतरने से पहले भारतीय टीम को अपनी कमियों को सुधारने के लिए कुल 13 टी-20 अंतरराष्ट्रीय (T20I) मैच खेलने का मौका मिलेगा। भारतीय टीम का आगामी व्यस्त शेड्यूल इस प्रकार है:

    • इंग्लैंड का दौरा (5 T20I): 1 जुलाई से 11 जुलाई के बीच भारत को इंग्लैंड के खिलाफ पांच मैचों की टी-20 सीरीज खेलनी है।
    • जिम्बाब्वे का दौरा (3 T20I): इसके तुरंत बाद 23 से 26 जुलाई तक जिम्बाब्वे के खिलाफ 3 मैच होंगे।
    • श्रीलंका का दौरा (2 T20I): अगस्त महीने में श्रीलंका के खिलाफ 2 टी-20 मैचों की सीरीज प्रस्तावित है।
    • अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू सीरीज (3 T20I): सितंबर की शुरुआत (13 से 16 सितंबर) में एशियन गेम्स के ठीक पहले अफगानिस्तान के खिलाफ 3 टी-20 मैच खेले जाएंगे।

    गंभीर और अय्यर इन 3 बड़ी खामियों को कैसे करेंगे दूर?

    आयरलैंड के खिलाफ संजू सैमसन, ईशान किशन और अभिषेक शर्मा जैसे सितारों से सजी टीम ताश के पत्तों की तरह ढह गई। इस ढाई महीने के ‘विंडो’ में कोच गंभीर और कप्तान अय्यर को इन मोर्चों पर काम करना होगा:

    1. टॉप ऑर्डर की निरंतरता (Consistency)

    आयरलैंड के खिलाफ दोनों मैचों में भारत का टॉप ऑर्डर (अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, ईशान किशन) पूरी तरह फ्लॉप रहा। गंभीर को इंग्लैंड दौरे से ही एक सेटल कॉम्बिनेशन तैयार करना होगा। यशस्वी जायसवाल और शुभमन गिल जैसे सीनियर खिलाड़ियों की गैरमौजूदगी में बैकअप ओपनर्स को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।

    2. मिडिल ऑर्डर का धीमा स्ट्राइक रेट

    श्रेयस अय्यर खुद नंबर 4 पर लौट रहे हैं, लेकिन आयरलैंड में तिलक वर्मा (55 रन, 46 गेंद) जैसे बल्लेबाजों का स्ट्राइक रेट चिंता का विषय रहा। गंभीर का हमेशा से मानना रहा है कि टी-20 में ‘एंकर’ की नहीं बल्कि ‘इम्पैक्ट’ की जरूरत होती है। टीम को मिडिल ओवर्स (7 से 15 ओवर) में आक्रामक क्रिकेट खेलने के लिए मानसिक रूप से तैयार होना होगा।

    3. डेथ बॉलिंग का संकट

    अर्शदीप सिंह और हर्षित राणा जैसे गेंदबाजों के होने के बावजूद भारतीय टीम आयरलैंड के पुछल्ले बल्लेबाजों को जल्दी आउट नहीं कर सकी और आखिरी ओवरों में रन लुटाए। गंभीर नेट सेशंस में डेथ बॉलिंग और सटीक यॉर्कर डालने पर विशेष जोर दे सकते हैं, क्योंकि जापान की पिचें भी स्पिन और धीमी गेंदबाजी के अनुकूल हो सकती हैं।

    चैलेंज बड़ा है: सुर्यकुमार यादव के खराब फॉर्म के बाद बाहर होने से श्रेयस अय्यर पर कप्तानी के साथ-साथ नंबर 4 पर खुद को साबित करने का भी दोहरा दबाव है।

    गौतम गंभीर की कोचिंग फिलॉसफी ‘फियरलेस क्रिकेट’ (निडर क्रिकेट) की रही है। आने वाले ढाई महीनों में होने वाले ये 13 मैच यह तय करेंगे कि क्या युवा भारत एशियन गेम्स में दोबारा गोल्ड जीतने के लिए तैयार है या नहीं।

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