संसद के चालू मानसून सत्र के अंतिम चरण में केंद्र सरकार एक बड़ा विधायी कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह 12 अगस्त 2026 को संसद में विदेश अंशदान विनियमन संशोधन विधेयक (FCRA Bill, 2026) पेश कर सकते हैं। इसके अलावा, परिसीमन (Delimitation) और महिला आरक्षण के क्रियान्वयन को लेकर भी सरकार एक नई राजनीतिक रणनीति पर काम कर रही है।
FCRA बिल 2026 को पारित कराना सरकार की प्राथमिकता
गृह मंत्रालय द्वारा लाए जा रहे इस संशोधन विधेयक का मुख्य उद्देश्य विदेशी फंडिंग की निगरानी और संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करना है।
- मुख्य प्रावधान: विधेयक में FCRA प्रमाणपत्रों की स्वतः समाप्ति (Cessation) और बिना नवीनीकरण वाली संस्थाओं के लिए ‘अंतरिम प्रबंधन’ (Interim Management) का तंत्र बनाने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
- मंजूरी का रास्ता: इस विधेयक को पास कराने के लिए केवल साधारण बहुमत की आवश्यकता है, जिसे सरकार आसानी से हासिल कर सकती है।
- संवेदनशीलता: मिजोरम और पूर्वोत्तर के ईसाई संगठनों द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं के बीच अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि सरकार संवाद के लिए तैयार है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस कानून पर किसी दबाव के आगे नहीं झुकेगी।
परिसीमन और महिला आरक्षण पर भाजपा का नया रुख
परिसीमन के लिए संविधान संशोधन विधेयक को अप्रैल 2026 में अपेक्षित दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के बाद सरकार अब दूसरे विकल्प पर विचार कर रही है:
| विषय | वर्तमान रणनीति एवं संवैधानिक स्थिति |
| पुराना प्रस्ताव | लोकसभा सीटें बढ़ाकर 850 करने तथा 2011 की जनगणना के आधार पर सभी राज्यों में कम से कम 50% सीटें बढ़ाने का वादा था। |
| संविधान संशोधन की जरूरत | संविधान संशोधन बिल न पास होने की स्थिति में, 2027 की जनगणना के बाद अनुच्छेद 81 और 82 के तहत स्वतः परिसीमन का रास्ता खुल जाएगा। |
| दक्षिण भारत पर प्रभाव | स्वाभाविक परिसीमन होने पर जनसंख्या नियंत्रण में आगे रहने वाले दक्षिणी राज्यों की सीटें उत्तरी राज्यों के मुकाबले कम रह सकती हैं। |
| विशेष सत्र की संभावना | यदि दक्षिणी राज्य 50% सीट वृद्धि की गारंटी वाले संविधान संशोधन पर सहमत होते हैं, तो सरकार मानसून सत्र के बाद अलग से विशेष सत्र बुला सकती है। |
2029 लोकसभा चुनाव पर पड़ेगा असर
2027 की जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद 2029 के आम चुनावों से पहले परिसीमन की प्रक्रिया पूरी करने का समय रहेगा। इसी परिसीमन के साथ ही 33% महिला आरक्षण (नारी शक्ति वंदन) को भी लोकसभा और विधानसभा सीटों पर लागू किया जाना तय है। सरकार इस रणनीति के जरिए विपक्षी दलों, विशेषकर दक्षिण भारतीय पार्टियों, पर परिसीमन विधेयक के समर्थन का राजनीतिक दबाव बना रही है।


