संसद के मानसून सत्र के दौरान कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रेणुका चौधरी अपने अनोखे और अनूठे अंदाज के कारण चर्चा में आ गईं। वह संसद परिसर में चश्मे पर ‘मोतिया’ और ‘बिंद’ लिखी स्लिप लगाकर पहुँचीं। इस सांकेतिक विरोध के जरिए उन्होंने केंद्र सरकार और उसके समर्थकों पर तीखा तंज कसा।
‘अंधभक्तों के इलाज’ के लिए लाया गया चश्मा
पत्रकारों से बातचीत करते हुए रेणुका चौधरी ने कहा कि यह चश्मा उन लोगों के लिए है जिन्हें देश में हो रही गंभीर समस्याएं और कमियां दिखाई नहीं देतीं: उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार को देश में लगातार गिरते हुए पुल, नीट (NEET) परीक्षा से जुड़ी धांधलियाँ और चंदा चोरी जैसे गंभीर मुद्दे नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जिन्हें सिर्फ प्रशंसा दिखाई देती है और असली समस्याएं नहीं दिखतीं, उनके ‘सही मेडिकल इलाज’ का इंतजाम किया जाना चाहिए।
संसद परिसर के मुख्य घटनाक्रम
| नेता / पक्ष | मुख्य बयान और रुख |
|---|---|
| रेणुका चौधरी (कांग्रेस) | ‘मोतियाबिंद’ चश्मा पहनकर सरकार की अनदेखी नीतियों का विरोध किया। |
| मल्लिकार्जुन खरगे (कांग्रेस) | गृह मंत्री अमित शाह से सदन में आकर छात्रों के मुद्दों और देश के हालात पर बयान देने की मांग की। |
| जगदंबिका पाल (भाजपा) | विपक्ष पर जानबूझकर संसद का समय बर्बाद करने और हंगामा फैलाने का आरोप लगाया। |
मल्लिकार्जुन खरगे का सरकार पर हमला
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी संसद में जारी गतिरोध के लिए सीधे तौर पर सरकार और गृह मंत्री को जिम्मेदार ठहराया। खरगे ने कहा कि विपक्ष पिछले 17 दिनों से चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन गृह मंत्री सदन में आकर अपनी बात रखने से बच रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार संसद को सुचारू रूप से चलाने में रुचि नहीं दिखा रही है और जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों की अनदेखी कर रही है।


