महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे चर्चित केंद्र, बारामती, आज एक भावुक और राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है। तत्कालीन उपमुख्यमंत्री और दिग्गज एनसीपी (NCP) नेता अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद रिक्त हुई इस विधानसभा सीट पर आज उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है।
सुनेत्रा पवार ने डाला वोट, पवार साहब को किया याद
महायुति की उम्मीदवार और महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने आज सुबह गांगूबाई काटे जिला परिषद प्राथमिक विद्यालय में अपना मतदान किया। वोट डालने के बाद उन्होंने मीडिया से बात करते हुए इस चुनाव को एक भावनात्मक मोड़ दिया।
सुनेत्रा पवार ने कहा, “बारामती की जनता पिछले 60 वर्षों से आदरणीय पवार साहब (अजित पवार) के साथ रही है। यह पहला चुनाव है जो उनके बिना हो रहा है, इसलिए जनता ने इस चुनाव की कमान अपने हाथों में ले ली है। लोग अपना वोट अजित दादा को एक श्रद्धांजलि के रूप में देना चाहते हैं।” उन्होंने आगे विश्वास जताया कि बारामती के लोग अजित पवार द्वारा किए गए विकास कार्यों का ‘ऋण’ उतारने के लिए भारी संख्या में बाहर निकलेंगे।
निर्विरोध की कोशिश नाकाम, कांग्रेस ने पेश की चुनौती
अजित पवार के कद को देखते हुए महाराष्ट्र के लगभग सभी प्रमुख दलों ने इस चुनाव को निर्विरोध संपन्न कराने पर सहमति जताई थी। हालांकि, कांग्रेस ने अंतिम समय में आकाश मोरे को अपना उम्मीदवार बनाकर मुकाबले को अनिवार्य कर दिया। कांग्रेस के इस कदम से स्पष्ट हो गया है कि बारामती में इस बार सहानुभूति की लहर के साथ-साथ कड़ा राजनीतिक संघर्ष भी देखने को मिलेगा।
- सीट का महत्व: यह सीट दिवंगत नेता अजित पवार का अभेद्य किला रही है।
- प्रमुख उम्मीदवार: महायुति से सुनेत्रा पवार बनाम कांग्रेस के आकाश मोरे।
- जनता का मूड: स्थानीय स्तर पर सहानुभूति की लहर देखी जा रही है, लेकिन विपक्षी खेमा विकास और स्थानीय मुद्दों पर घेराबंदी कर रहा है।
इस उपचुनाव के नतीजे न केवल बारामती की अगली दिशा तय करेंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि अजित पवार की राजनीतिक विरासत पर जनता की मुहर कितनी गहरी है। परिणाम आने वाले समय में राज्य की राजनीति के समीकरणों को प्रभावित कर सकते हैं।


