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    अरशद वारसी @58: पढ़ाई बीच में छोड़ी, एक्टिंग से लगता था डर, ऐसे शुरू किया करियर

    बॉलीवुड के ‘सर्किट’ यानी अरशद वारसी आज अपना 58वां जन्मदिन मना रहे हैं। अपनी बेहतरीन कॉमिक टाइमिंग और सहज अभिनय से दर्शकों के दिलों में जगह बनाने वाले अरशद का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। एक समय ऐसा था जब उन्होंने ज़िंदगी के सबसे कठिन दौर का सामना किया, लेकिन अपनी मेहनत और जुनून से वे ‘कॉमेडी किंग’ बनकर उभरे।

    बचपन का संघर्ष और माता-पिता का निधन

    अरशद वारसी का शुरुआती जीवन संघर्षों से भरा रहा। जब वे मात्र 14 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया। इसके कुछ ही समय बाद उनकी माता का भी देहांत हो गया। माता-पिता के निधन ने अरशद को पूरी तरह तोड़ दिया था। अचानक आई इस विपदा ने उन्हें आर्थिक तंगी के मुहाने पर खड़ा कर दिया, जिसके कारण उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी।

    सर्वाइवल की जंग: घर-घर जाकर बेचा सामान

    किशोरावस्था में ही कंधों पर आई जिम्मेदारी को निभाने के लिए अरशद ने सेल्समैन का काम शुरू किया। वे मुंबई की बसों में सफर करते थे और घर-घर जाकर कॉस्मेटिक्स और लिपस्टिक बेचा करते थे। उन्होंने एक फोटो लैब में भी काम किया ताकि गुजारा हो सके। इन कठिन दिनों ने उन्हें जीवन की कड़वी सच्चाई और लोगों को परखने का हुनर सिखाया।

    नृत्य के प्रति जुनून और कोरियोग्राफी

    अरशद को अभिनय में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी; उनका असली शौक डांस था। उन्होंने अकबर सामी के डांस ग्रुप को ज्वाइन किया और जल्द ही अपनी प्रतिभा के दम पर 1991 में एक डांस कॉम्पिटिशन जीता। इसके बाद उन्होंने अपना खुद का डांस स्टूडियो खोला और फिल्मों में बतौर कोरियोग्राफर काम करना शुरू किया। फिल्म ‘रूप की रानी चोरों का राजा’ के टाइटल ट्रैक को उन्होंने ही कोरियोग्राफ किया था।

    एक्टर नहीं बनना चाहते थे अरशद

    अरशद वारसी कभी भी एक्टर नहीं बनना चाहते थे। उन्हें एक्टिंग से डर लगता था। जब जया बच्चन ने उन्हें ‘एबी कॉर्प’ की फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ (1996) के लिए ऑफर दिया, तो उन्होंने पहले मना कर दिया था। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था; फिल्म हिट रही और अरशद का अभिनय करियर शुरू हो गया।

    ‘मुन्ना भाई’ और सर्किट का उदय

    अरशद के करियर में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साल 2003 में आई राजकुमार हिरानी की फिल्म ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ रही। ‘सर्किट’ के किरदार ने उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया। इसके बाद ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘गोलमाल’ सीरीज, ‘धमाल’ और ‘जॉली एलएलबी’ जैसी फिल्मों ने उन्हें इंडस्ट्री का सबसे भरोसेमंद कॉमेडी एक्टर और वर्सटाइल आर्टिस्ट साबित कर दिया।

    अरशद वारसी की सफलता के सूत्र:

    • लचीलापन: जीवन की विपरीत परिस्थितियों (अनाथ होना, गरीबी) के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी।
    • कड़ी मेहनत: सेल्समैन से लेकर कोरियोग्राफर और फिर एक्टर बनने तक का सफर उनकी अथक मेहनत का परिणाम है।
    • सहजता: उन्होंने कभी अपनी इमेज की चिंता नहीं की और सपोर्टिंग रोल में भी अपनी छाप छोड़ी।

    आज अरशद वारसी न केवल एक सफल अभिनेता हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा भी हैं जो शून्य से अपना साम्राज्य खड़ा करना चाहते हैं। उनकी कहानी सिखाती है कि यदि आपमें हुनर और मेहनत करने का जज्बा है, तो सफलता के रास्ते खुद-ब-खुद खुल जाते हैं।

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