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    ट्विशा शर्मा की मौत का मामला, एम्स की रिपोर्ट में हुआ ये बड़ा खुलासा

    मध्य प्रदेश के चर्चित ट्विशा शर्मा मौत मामले (Twisha Sharma Death Case) में एक बेहद चौंकाने वाला और महत्वपूर्ण मोड़ आया है। दिल्ली अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के मेडिकल बोर्ड ने इस मामले में अपनी अंतिम रिपोर्ट केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंप दी है। इस 11 पन्नों की सीलबंद रिपोर्ट में किए गए खुलासों ने जांच की दिशा बदल दी है। एम्स की फोरेंसिक जांच में यह पुष्टि हुई है कि जिस जिम्नास्टिक/जिम बेल्ट को फंदे के रूप में इस्तेमाल करने का दावा किया गया था, उस पर इंसानी ‘स्किन टिश्यू’ (त्वचा के ऊतक) पाए गए हैं। ये स्किन टिश्यू पूरी तरह से ट्विशा के गले पर मिले चोट के निशानों (Ligature Marks) से मेल खाते हैं।

    ​एम्स की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु और बड़े खुलासे

    ​एम्स दिल्ली के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता के नेतृत्व में 5 सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने इस मामले की गहन वैज्ञानिक और हिस्टोपैथोलॉजिकल जांच की है। इस रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

    • स्किन टिश्यू का मिलना: प्रयोगशाला जांच में जिम बेल्ट पर मौजूद धातु के छल्ले और बेल्ट के हिस्से से त्वचा के ऊतक बरामद हुए हैं। डीएनए और वैज्ञानिक परीक्षणों में यह साबित हुआ है कि यह ट्विशा शर्मा के ही टिश्यू हैं।
    • चोट के पैटर्न से मिलान: एम्स बोर्ड ने पाया कि बेल्ट की बनावट और उस पर लगे धातु के छल्ले से बनने वाले निशान, ट्विशा के गले पर आई चोटों के वैज्ञानिक पैटर्न से पूरी तरह मेल खाते हैं।
    • वैज्ञानिक स्पष्टीकरण: डॉक्टरों के अनुसार, यह रिपोर्ट सीबीआई और न्यायपालिका के लिए इस रहस्यमयी मौत का सच सामने लाने में ‘क्रिस्टल-क्लियर’ (पूरी तरह स्पष्ट) साक्ष्य का काम करेगी। बोर्ड ने करीब एक महीने तक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय चिकित्सा शोधों का अध्ययन करने के बाद यह राय दी है।

    ​पहले पोस्टमार्टम और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

    ​इस मामले में शुरुआत से ही भोपाल पुलिस की जांच और पहले पोस्टमार्टम पर गंभीर सवाल उठ रहे थे।

    सबसे बड़ी लापरवाही: जब भोपाल में ट्विशा का पहला पोस्टमार्टम हुआ था, तब जांच अधिकारी (IO) ने पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के सामने वह जिम बेल्ट (घटना में प्रयुक्त हथियार/सामग्री) पेश ही नहीं की थी। इस वजह से पहली रिपोर्ट में चोट के निशानों और बेल्ट का कोई वैज्ञानिक मिलान नहीं हो सका था।

    ​ट्विशा के परिवार ने पुलिस पर सबूतों को छुपाने और मामले को दबाने का आरोप लगाते हुए आंदोलन किया था। इसके बाद मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (जबलपुर) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एम्स दिल्ली के डॉक्टरों से दोबारा पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच कराने का ऐतिहासिक आदेश दिया था।

    ​आगे की राह और सीबीआई की जांच

    ​सीबीआई की टीम इस मामले में लगातार सबूत जुटा रही है। हाल ही में सीबीआई ने आरोपियों—गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह—की मौजूदगी में डमी (पुतले) के जरिए घटना स्थल का ‘क्राइम सीन रीक्रिएशन’ भी किया था। एम्स की इस वैज्ञानिक रिपोर्ट के बाद अब आरोपियों की मुश्किलें बढ़ना तय माना जा रहा है। बेल्ट पर स्किन टिश्यू का मिलना यह साबित करता है कि ट्विशा की मौत के वक्त इसी बेल्ट का इस्तेमाल हुआ था, जिससे अब इस मौत के पीछे की असली साजिश का पर्दाफाश जल्द होने की उम्मीद है।

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