जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले की बरसी के अवसर पर अमेरिका के प्रभावशाली सांसदों ने एक सुर में पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया है। अमेरिकी कांग्रेस के सदस्यों ने मांग की है कि पाकिस्तान अपनी धरती पर सक्रिय लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) जैसे आतंकी संगठनों के खिलाफ निर्णायक और ठोस कार्रवाई करे।
‘आतंकवाद के सुरक्षित पनाहगाह खत्म हों’
अमेरिकी सांसदों ने एक संयुक्त बयान और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पहलगाम हमले के पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी। सांसदों ने जोर देकर कहा कि दक्षिण एशिया में शांति तभी संभव है जब आतंकवाद को सरकारी या संस्थागत समर्थन मिलना पूरी तरह बंद हो जाए।
- प्रमुख मांग: सांसदों ने आग्रह किया है कि पाकिस्तान पर दबाव बनाया जाए ताकि वह अपनी सीमाओं के भीतर सक्रिय आतंकी बुनियादी ढांचे को नष्ट करे।
- लश्कर और जैश का खतरा: सांसदों ने चेतावनी दी कि ये संगठन न केवल भारत, बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए भी एक निरंतर खतरा बने हुए हैं।
सुरक्षा सहयोग और भारत का रुख
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा, “हम भारत के साथ खड़े हैं और आतंकवाद के खिलाफ उनकी लड़ाई का समर्थन करते हैं। पाकिस्तान को यह समझना होगा कि आतंकवाद को विदेश नीति के उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने के दिन अब लद चुके हैं।”
पहलगाम हमला: एक दर्दनाक याद
1 साल पहले पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को झकझोर दिया था, जिसमें 26 निर्दोष नागरिक शहीद हुए थे। इस हमले के तार सीधे तौर पर सीमा पार बैठे आकाओं से जुड़े पाए गए थे। आतंकी हमलों के साजिशकर्ताओं को कानून के कटघरे में खड़ा किया जाना चाहिए। जैश और लश्कर जैसे संगठनों की फंडिंग के स्रोतों को पूरी तरह ब्लॉक करने की आवश्यकता। पाकिस्तान को दी जाने वाली भविष्य की सहायता को आतंकवाद के खिलाफ उसकी प्रगति से जोड़ा जाना चाहिए।
भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित ‘आतंकवाद की मानवीय कीमत’ विषय पर एक प्रदर्शनी के दौरान अमेरिकी सांसदों ने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। इस कार्यक्रम में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक दोनों दलों के प्रमुख नेताओं ने शिरकत की और आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े रुख का समर्थन किया।
दुनिया ने गंभीरता से नहीं लिया, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की चर्चा
डेमोक्रेटिक सांसद ने पाकिस्तान से लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे समूहों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने 2025 के पहलगाम हमले के पीड़ितों को याद करते हुए गहरी संवेदना व्यक्त की। भारतीय मूल के सांसद रो खन्ना ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को याद किया। उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी ने 90 के दशक में ही इस खतरे की चेतावनी दी थी, जिसे तब दुनिया ने गंभीरता से नहीं लिया था। लिसा मैक्लेन ने आतंकवाद से निपटने के लिए खुफिया जानकारी साझा करने और सामूहिक सहयोग पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान 7 मई 2025 को भारत द्वारा चलाए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष उल्लेख हुआ। इस ऑपरेशन के तहत भारत ने पाकिस्तान और PoK में आतंकियों के 9 ठिकाने तबाह किए थे, जिसके बाद दोनों देशों के बीच 88 घंटे तक सैन्य संघर्ष चला था। सांसद रिचर्ड मैककॉर्मिक ने अंत में आतंकवाद को एक ‘अनोखी बुराई’ करार देते हुए इसे भारत और अमेरिका दोनों के लिए साझा खतरा बताया।


