उच्चतम न्यायालय ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के पुत्र और जेसीसी (जे) के अध्यक्ष अमित जोगी को बड़ी कानूनी राहत दी है। शीर्ष अदालत ने एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की 2003 में हुई हत्या के मामले में अमित जोगी की दोषसिद्धि (Conviction) और आजीवन कारावास की सजा पर अंतरिम रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की पीठ ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के उस फैसले पर सवाल उठाए, जिसमें अमित जोगी को बिना उनका पक्ष सुने सीधे सजा सुना दी गई थी।
4 जून, 2003 को रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय अजीत जोगी राज्य के मुख्यमंत्री थे। सीबीआई की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी ठहराया था, लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। हाल ही में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए अमित जोगी को हत्या की साजिश का दोषी माना और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने का भी आदेश दिया था।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाते हुए सीबीआई (CBI) को नोटिस जारी किया है। इस स्टे के बाद अब अमित जोगी को जेल जाने या सरेंडर करने की तत्काल आवश्यकता नहीं होगी।
यह मामला छत्तीसगढ़ की राजनीति में दो दशकों से अधिक समय से चर्चा का विषय रहा है। पीड़ितों के परिवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने स्टे का विरोध किया, लेकिन शीर्ष अदालत ने प्रक्रियात्मक खामियों को देखते हुए सजा पर रोक लगाना उचित समझा। अब इस मामले की अगली सुनवाई आगामी हफ्तों में होगी।


