भारतीय क्रिकेट की नई युवा सनसनी वैभव सूर्यवंशी ने आईपीएल 2026 में राजस्थान रॉयल्स की तरफ से खेलते हुए ऑरेंज कैप जीती और रिकॉर्ड्स की झड़ी लगा दी। टूर्नामेंट में 237 के बेमिसाल स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाने और क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए 72 छक्के जड़ने के बाद उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टी20 टीम में शामिल किया गया है।
मगर समस्तीपुर (बिहार) के इस 15 वर्षीय युवा खिलाड़ी का अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का यह सफर आसान नहीं था। उनके पुल और एरियल शॉट पर इस महारत के पीछे उनके कोच और पिता की कड़ी तपस्या छिपी है।
मसल्स मेमोरी: एक शॉट के लिए 600 से 1000 गेंदें
कोविड-19 के दौर में वैभव के पिता संजीव सूर्यवंशी अपने बेटे को सप्ताह में चार दिन समस्तीपुर से पटना कोच मनीष ओझा के पास लेकर जाते थे। संजीव अपने साथ समस्तीपुर से पांच अन्य स्थानीय गेंदबाजों को भी लाते थे, जिनका मुख्य काम वैभव को लगातार गेंदबाजी कराना होता था।
जब पूर्व रणजी क्रिकेटर और कोच मनीष ओझा ने देखा कि वैभव को पुल, हुक और एरियल (हवाई) शॉट खेलने में काफी मजा आता है, तो उन्होंने एक अनोखी रणनीति अपनाई:
- उन्होंने अपनी एकेडमी के और पिता द्वारा लाए गए गेंदबाजों को निर्देश दिया कि वे वैभव को किसी एक तय शॉट के अभ्यास के लिए 600 से लेकर 1000 गेंदें फेंकें।
- यह अभ्यास लंबे समय तक लगातार चलता रहा। कोच मनीष ओझा बताते हैं कि इतनी भारी मात्रा में एक ही शॉट खेलने के कारण पुल, हुक और एरियल शॉट वैभव के हाथों की मांसपेशियों में समा गए हैं (यानी मसल्स मेमोरी बन चुके हैं)। यही वजह है कि आज पिच पर कोई भी गेंदबाज हो, वैभव बिना किसी झिझक के सफाई से ये शॉट लगा लेते हैं।
पिता का त्याग: 50 लाख रुपये का कर्ज
वैभव की इस शानदार सफलता के पीछे उनके पिता संजीव का बहुत बड़ा और दर्दभरा संघर्ष छुपा है। कोविड के मुश्किल दिनों में जब वह वैभव को अभ्यास के लिए पटना लाते थे, तो वे गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहे थे। उन्होंने अपने दोस्तों और करीबियों से 25 से 50 लाख रुपये तक का भारी कर्ज ले रखा था।
बेटे के खेल पर कोई असर न पड़े, इसलिए संजीव ने कभी वैभव के सामने इस कर्ज का जिक्र तक नहीं होने दिया। जब आईपीएल 2026 के ऑक्शन में वैभव को राजस्थान रॉयल्स ने चुना, तब जाकर मिली राशि से इस परिवार ने अपना सारा पुराना कर्ज चुकाया।
10 साल की उम्र में ही कोच ने भांप ली थी प्रतिभा
कोच मनीष ओझा ने एक पुराना किस्सा साझा करते हुए बताया कि कोविड के दौरान एक दिन उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। वैभव अभ्यास के लिए मैदान पर आ चुके थे, तो कोच ने उन्हें नेट प्रैक्टिस कराने के बजाय सीधे एक मैच में उतार दिया।
उस मैच में विरोधी टीम में कई अंडर-19, अंडर-23 और एक रणजी ट्रॉफी के अनुभवी क्रिकेटर खेल रहे थे। मगर 10 साल के नन्हे वैभव ने महज 93 गेंदों में 118 रनों की तूफानी पारी खेल दी, जिसमें 8 गगनचुंबी छक्के शामिल थे (सभी छक्के 75 मीटर से अधिक लंबे थे)। उसी दिन मनीष ओझा ने वैभव के पिता से कह दिया था कि यह लड़का एक दिन देश के लिए जरूर खेलेगा।
पिता का कड़ा अनुशासन
मैदान पर वैभव के पिता संजीव हमेशा एक सख्त अनुशासन बनाए रखते थे। वैभव अपने पिता से काफी डरते भी हैं। अभ्यास के दौरान उनके पिता मैदान के एक कोने में बैठ जाते थे और वहां से हिलते नहीं थे। इसी कड़े अनुशासन का नतीजा है कि वैभव ने पटना में कभी एक भी दिन अभ्यास नहीं छोड़ा और हर दिन नए-नए शॉट्स सीखने पर ध्यान केंद्रित किया।


