पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लारक द्वीप पर दो रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बनाया है। इसके बाद ईरान की ओर से जवाबी कार्रवाई की खबर सामने आई है। इसी बीच पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के तहत पहली रणनीतिक बैठक सोमवार को इस्तांबुल में होने जा रही है। ऐसे में क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ ईरान युद्ध को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है।
लारक द्वीप पर अमेरिकी कार्रवाई
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिकी बलों ने रविवार को लारक द्वीप पर ईरान के दो लॉन्चरों पर हमला किया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जवान इन लॉन्चरों के जरिए होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री बारूदी सुरंगें पहुंचाने की तैयारी कर रहे थे। अमेरिका ने इसे नौवहन की स्वतंत्रता के लिए तत्काल खतरा बताते हुए सीमित और सटीक कार्रवाई करार दिया है।
लारक द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है और इसकी रणनीतिक स्थिति बेहद अहम है। इस जलमार्ग से वैश्विक तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इसलिए यहां किसी भी सैन्य टकराव का असर केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं रह सकता। अमेरिकी हमले के बाद ईरान की ओर से जॉर्डन स्थित दो अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाकर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबर है। जॉर्डन ने कई मिसाइलों को रोकने का दावा किया है।
मोजतबा खामेनेई का मुस्लिम देशों से आह्वान
तनाव के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने इस्लामी देशों के शासकों से एकजुट होने और अपने कथित ‘असली दुश्मन’ को पहचानने का आह्वान किया है। उन्होंने मुस्लिम देशों से क्षेत्र में अमेरिका और इस्राइल की योजनाओं का सामना करने की अपील की। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और कई खाड़ी देशों के बीच भी तनाव बना हुआ है।
मक्का समझौते की पहली बैठक आज
दूसरी ओर, पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच 7 अगस्त को हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते के बाद पहली रणनीतिक राजनीतिक एवं रक्षा समिति की बैठक सोमवार को इस्तांबुल में होगी। पाकिस्तान के उप प्रधानमंत्री इशाक डार और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तुर्किये पहुंच चुके हैं। बैठक में तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान, रक्षा मंत्री यासर गुलर और सेना प्रमुख जनरल सेल्चुक बायरक्तारोग्लू के शामिल होने की जानकारी दी गई है।
समझौते की सबसे अहम शर्त यह है कि तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने पर उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। हालांकि पहली बैठक का आधिकारिक एजेंडा अभी स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन मौजूदा हालात में ईरान युद्ध और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और मिस्र के अधिकारियों की अलग बैठक भी होगी, जिसमें क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा पर चर्चा होगी।
इस तरह लारक द्वीप पर अमेरिकी हमले और मक्का रक्षा समझौते की पहली बैठक ने पश्चिम एशिया के बदलते सुरक्षा समीकरणों को फिर केंद्र में ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्षेत्रीय देश सैन्य टकराव को रोकने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाते हैं या मौजूदा गठजोड़ और अधिक सक्रिय होते हैं।


