भारत के मौसम में इस समय बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव के कारण देश के बड़े हिस्से में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग (IMD) ने देश के 25 राज्यों में 18 जून तक तेज हवाओं के साथ बारिश और कुछ स्थानों पर ओलावृष्टि की संभावना जताई है।
25 राज्यों में भारी बदलाव और जानमाल का नुकसान
पिछले 24 घंटों में जम्मू-कश्मीर से लेकर तटीय कर्नाटक तक गरज-चमक के साथ तेज बारिश दर्ज की गई है। इस दौरान कई क्षेत्रों में 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से विनाशकारी आंधी चली है। मौसम की इन चरम घटनाओं के कारण बड़ा नुकसान हुआ है:
- बिहार: बिजली गिरने (Vajrapat) के कारण 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई।
- पंजाब: वर्षा और आंधी से जनित अलग-अलग हादसों में 3 लोगों की जान चली गई।
- केरल व अन्य राज्य: केरल के कुछ हिस्सों में 12 से 20 सेंटीमीटर तक मूसलाधार बारिश हुई है, जबकि असम, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और तमिलनाडु में 7 से 11 सेंटीमीटर तक पानी गिरा है।
18 जून तक इन क्षेत्रों में रहेगा अलर्ट
मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों—जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में 18 जून तक मौसम खराब रहेगा। इन इलाकों में 40 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से धूलभरी आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी है। इसके अलावा अंडमान-निकोबार, झारखंड, बिहार, ओडिशा, गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी अगले 3-4 दिनों तक भारी बारिश का अनुमान है।
मानसून पर अल नीनो (El Niño) का साया
इस तात्कालिक राहत के बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मानसून को लेकर एक बड़ी चिंताजनक पुष्टि की है। प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति आधिकारिक तौर पर सक्रिय हो गई है।
अल नीनो क्या है? यह प्रशांत महासागर के केंद्रीय और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह के तापमान में होने वाली असामान्य बढ़ोतरी है। जब यह सक्रिय होता है, तो भारत में मानसून की हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और सूखे जैसी स्थिति पैदा होती है।
- चिंता का कारण: जून 2026 के बुलेटिन के अनुसार, केंद्रीय उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर का तापमान अल नीनो की तय दहलीज (+0.5°C) को पार कर चुका है। इसके चलते इस बार देश में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका दोगुनी (35% तक) हो गई है।
- उम्मीद की किरण (Positive IOD): वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि जुलाई के महीने में हिंद महासागर में ‘सकारात्मक हिंद महासागर द्विध्रुव’ (Positive Indian Ocean Dipole) बनता है, तो वह अल नीनो के इस बुरे प्रभाव को काट सकता है और भारत में अच्छी बारिश लाने में मदद कर सकता है। हालांकि, फिलहाल आईएमडी इसे तटस्थ (Neutral) मानकर चल रहा है।


