उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण पर पहली बार अपनी चुप्पी तोड़ी है। शुक्रवार को अयोध्या के दौरे पर पहुंचे सीएम योगी ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले की गहन जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जो पूरी पारदर्शिता के साथ सच को सामने लाएगा। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाते हुए कहा, “हमने ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी जांच बैठाई है। एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करके रहेगी।”
सीएम योगी ने इस दौरान विपक्ष, विशेषकर समाजवादी पार्टी (सपा) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग कभी रामभक्तों और कारसेवकों पर गोलियां चलवाते थे, आज वे इस मुद्दे पर उपदेश दे रहे हैं। मुख्यमंत्री ने सपा के रुख को उनका ‘दोहरा चरित्र’ करार दिया।
चढ़ावा चोरी विवाद के बीच मुख्यमंत्री ने सभी पक्षों और राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस संवेदनशील मामले पर किसी भी तरह की अनर्गल या बेबुनियाद टिप्पणी करने से बचें। उन्होंने जोर देकर कहा कि ऐसी बयानबाजी से देश-विदेश में रहने वाले करोड़ों रामभक्तों की भावनाएं आहत होती हैं।
जांच में अब तक क्या हुआ?
राम मंदिर में दान और चढ़ावे की राशि में कथित हेरफेर की शिकायत के बाद से ही अयोध्या का सियासी तापमान गर्म है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार बेहद मुस्तैद है:
- SIT की मैराथन पूछताछ: विशेष जांच दल (SIT) की टीम अयोध्या पहुंचकर लगातार जांच में जुटी है। खबरों के मुताबिक, एसआईटी ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और मंदिर के व्यवस्थापक गोपाल राव से पूछताछ की है। इसके अलावा ट्रस्टी अनिल मिश्र और मंदिर के मौजूदा व पूर्व कर्मचारियों की सूची जुटाकर उनसे भी सुराग तलाशे जा रहे हैं।
- 7 दिन में प्रारंभिक रिपोर्ट: एसआईटी द्वारा इस मामले की शुरुआती रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर और पूरी विस्तृत रिपोर्ट 15 दिनों में तैयार करने की उम्मीद है।
- व्यवस्था में बड़ा बदलाव: चोरी की खबरों के सामने आने के बाद राम मंदिर ट्रस्ट ने भी अपने स्तर पर सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ा दी है। अब मंदिर में आने वाले कैश और दानराशि की गिनती साप्ताहिक या पाक्षिक न होकर रोजाना (Daily) की जा रही है, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।
अपने अयोध्या दौरे के दौरान सीएम योगी आदित्यनाथ ने मां कामाख्या मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया और जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था और मंदिर से जुड़ी नई व्यवस्थाओं की समीक्षा की।


