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ईरानी डेलीगेशन को मारने की थी साजिश, मोहम्मद मरांदी ने किया बड़ा दावा, इस तरह बचे

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक सनसनीखेज दावा सामने आया है। ईरान का आरोप है कि इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में अमेरिका के साथ हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद, उसके उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल को जान से मारने की साजिश रची गई थी। इस खतरे के कारण ईरानी नेताओं को अपना विमान छोड़कर बस और ट्रेन के जरिए बेहद गोपनीय तरीके से तेहरान लौटना पड़ा।

विमान बदलने और गुप्त यात्रा की वजह

ईरानी राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद मरांदी ने दावा किया है कि वार्ता के बाद जब ईरानी डेलीगेशन वापस लौट रहा था, तब उन्हें रास्ते में विमान पर हमले की प्रत्यक्ष सुरक्षा धमकी (Direct Security Threat) मिली। खतरे को भांपते हुए प्रतिनिधिमंडल के विमान को उत्तर-पूर्वी ईरान के मशहद (Mashhad) शहर में उतारा गया। मशहद से तेहरान तक का बाकी सफर नेताओं ने सुरक्षा कारणों से विमान के बजाय बस, कार और ट्रेन के जरिए गुपचुप तरीके से तय किया। मरांडी के अनुसार, ईरानी नेताओं के आधिकारिक विमान को आसानी से ट्रैक किया जा सकता था, इसलिए अंतिम समय पर ‘प्लान बी’ को लागू किया गया।


वार्ता में कौन-कौन शामिल था?

इस्लामाबाद में हुई इस गुप्त और हाई-प्रोफाइल बैठक में दोनों पक्षों के बड़े चेहरे शामिल थे:

  1. ईरान की ओर से: विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ।
  2. अमेरिका की ओर से: उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance)।

साजिश के पीछे कौन?

ईरान ने सीधे तौर पर अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह वार्ता की मेज पर दबाव बनाने के लिए डराने-धमकाने और हमले की रणनीति अपना रहा है। मरांदी ने स्पष्ट कहा, “हम अमेरिका पर भरोसा नहीं करते।” हालांकि, अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर इन आरोपों पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने क्षेत्र में ईरान समर्थित गुटों की गतिविधियों को तनाव का मुख्य कारण बताया है।


वार्ता क्यों विफल हुई?

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्लामाबाद में हुई बातचीत कई प्रमुख मुद्दों पर सहमति न बनने के कारण टूट गई:

  • परमाणु कार्यक्रम: ईरान ने यूरेनियम संवर्धन (Nuclear Enrichment) रोकने से साफ इनकार कर दिया।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य: अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी और ईरान द्वारा इस समुद्री मार्ग को बंद करने की धमकी पर कोई समझौता नहीं हो सका।
  • रेड लाइन्स: जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका की ‘रेड लाइन्स’ तय हैं और वे ईरान को परमाणु हथियार बनाने की अनुमति कभी नहीं देंगे।
  • यह घटना दर्शाती है कि अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीति अब युद्ध के मुहाने पर पहुँच चुकी है। एक तरफ जहाँ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अगले दो दिनों में फिर से बातचीत की संभावना जता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा चिंताओं और ‘हत्या की साजिश’ के दावों ने अविश्वास की खाई को और गहरा कर दिया है।
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