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    सूखा और भुखमरी, ‘अल नीनो’ होगा विनाशकारी, मौसम वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी

    मौसम के मोर्चे पर दुनिया एक अभूतपूर्व और बड़े संकट की दहलीज पर खड़ी है। मौसम वैज्ञानिकों ने एक नए और डराने वाले अनुमान के आधार पर चेतावनी दी है कि इस साल प्रशांत महासागर में बनने वाला ‘अल नीनो’ (El Nino) अब तक के इतिहास का सबसे शक्तिशाली और विनाशकारी रूप ले सकता है। इस आसन्न संकट को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने दुनिया को कड़े शब्दों में सचेत किया है।

    तोड़ेगा गर्मी के सारे रिकॉर्ड, ‘चूल्हा’ बन जाएगी धरती

    यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट (ECMWF) और लाइव साइंस की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल दिसंबर तक मध्य भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान औसत से 5.4 (3 डिग्री सेल्सियस), 7.2 डिग्री फारेनहाइट (4 डिग्री सेल्सियस) तक ऊपर जा सकता है। तक ऊपर जा सकता है।

    • पिछला रिकॉर्ड होगा ध्वस्त: यह स्थिति साल 1997-1998 और 2015-2016 के सबसे खतरनाक माने गए अल नीनो रिकॉर्ड्स को भी पीछे छोड़ देगी। पिछली दोनों घटनाओं के दौरान तापमान में 4.1 डिग्री फारेनहाइट (2.3 डिग्री सेल्सियस) की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
    • आग में घी का काम: यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस ने वीडियो संदेश में कहा कि अल नीनो की ये स्थितियां पहले से ही रिकॉर्ड स्तर पर गर्म हो रही हमारी धरती की आग में घी डालने का काम करेंगी। इसके विनाशकारी प्रभाव बहुत तेजी से अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं को पार करेंगे।

    कब तक आएगा और कितनी है संभावना?

    विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के ताजा जलवायु अपडेट के अनुसार:

    • जून से अगस्त के बीच अल नीनो की स्थितियां बनने की संभावना 80% है।
    • नवंबर तक इसके और मजबूत होकर जारी रहने की आशंका 90% से भी अधिक है।

    अमेरिकी मौसम एजेंसी (NOAA) के मुताबिक भी इसके बनने की दर 80% से ऊपर है, जो शुरुआती 2027 तक खिंच सकती है। इसके चलते आने वाले महीनों में दुनिया के लगभग सभी हिस्सों में असामान्य रूप से भारी गर्मी और लू (Heatwave) का प्रकोप देखने को मिलेगा।

    खेती-बाड़ी और पानी पर सीधा संकट

    अल नीनो के इस रौद्र रूप के कारण वैश्विक स्तर पर मौसम का चक्र पूरी तरह गड़बड़ा जाएगा:

    1. सूखा और भुखमरी: दक्षिण एशिया (विशेषकर भारत) में मानसून की बारिश सामान्य से कम होने का अनुमान है। कमजोर मानसून से फसलों का उत्पादन प्रभावित होगा, जिससे खाद-सामग्री की कीमतों में उछाल और पानी की भीषण किल्लत हो सकती है।
    2. बाढ़ और तूफान: जहां एक तरफ सूखा पड़ेगा, वहीं लैटिन अमेरिका और अमेरिका के कुछ हिस्सों में भारी बारिश, विनाशकारी बाढ़ और तूफानों की रफ्तार तेज होने की आशंका है।
    3. हेल्थ इमरजेंसी: अत्यधिक गर्मी और लू के चलते बुजुर्गों, बच्चों और खुले में काम करने वाले मजदूरों के स्वास्थ्य पर सीधा खतरा मंडरा रहा है।

    क्या है समाधान?

    यूएन प्रमुख ने साफ किया है कि इस संकट से निपटने का एकमात्र रास्ता ‘सख्त क्लाइमेट एक्शन’ है। दुनिया को फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) पर अपनी निर्भरता तुरंत खत्म करनी होगी, रिन्यूएबल एनर्जी को अपनाना होगा और सबसे महत्वपूर्ण रूप से हर देश को ‘अर्ली वॉर्निंग सिस्टम’ (समय पूर्व चेतावनी प्रणाली) लागू करनी होगी ताकि जान-माल के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके।

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