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    अयोध्या के श्रीराम मंदिर के चढ़ावे की चोरी, PMO तक पहुंचा मामला, महंत बोले-मन में संदेह था

    अयोध्या के भव्य श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि (चढ़ावे) की कथित हेराफेरी और गबन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब लगातार गहराता जा रहा है। इस संवेदनशील मामले में अब एक प्रमुख संत की एंट्री हो गई है, जिन्होंने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाकर इस पूरे प्रकरण को एक नया मोड़ दे दिया है। यह पूरा मामला अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक और धार्मिक हलकों में भी इसे लेकर भारी हलचल है। इस विवाद के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं।

    महंत कमल नयन दास का बयान: “मन में संदेह पैदा हो रहा है”

    श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान व्यवस्था और कथित गड़बड़ी को लेकर अयोध्या के प्रतिष्ठित महंत कमल नयन दास ने बड़ा बयान दिया है। महंत ने कहा कि अगर मंदिर की दान राशि में कहीं भी कोई गड़बड़ी या अनियमितता हुई है, तो उसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच अवश्य होनी चाहिए। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि वर्तमान समय में जो लोग इस मामले की जांच कर रहे हैं, उनकी निष्पक्षता पर ही सवाल उठने लगे हैं। जांचकर्ताओं के रवैये के कारण अब आम लोगों और श्रद्धालुओं के “मन में संदेह पैदा हो रहा है।”

    नृपेंद्र मिश्र का अचानक अयोध्या दौरा और गोपनीय बैठक

    इस विवाद की गंभीरता को देखते हुए राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के पूर्व प्रमुख सचिव नृपेंद्र मिश्र सोमवार को अचानक अयोध्या पहुंचे। नृपेंद्र मिश्र ने अयोध्या पहुंचते ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मंदिर प्रबंधन से जुड़े शीर्ष अधिकारियों के साथ बंद कमरे में एक लंबी बैठक की। इस बैठक को पूरी तरह गोपनीय रखा गया और इसकी कार्यसूची (Agenda) को लेकर कोई भी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। इस गुप्त दौरे और बैठक के बाद मंगलवार सुबह ही वह वापस दिल्ली लौट गए। राजनीतिक हलकों में इस दौरे को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है और कयास लगाए जा रहे हैं कि इसकी एक विस्तृत रिपोर्ट शीर्ष स्तर (PMO) तक पहुंच सकती है।

    प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) पहुंचा मामला

    दान राशि में करोड़ों रुपये की हेराफेरी का यह मुद्दा अब देश की शीर्ष सत्ता तक पहुंच चुका है। भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने इस पूरे प्रकरण के संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक शिकायती पत्र भेजा है। डॉ. सिंह ने पीएम को लिखे पत्र में मांग की है कि चूंकि राम मंदिर देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है, इसलिए यहां के चढ़ावे और प्रशासन से जुड़े किसी भी आरोप की उच्चस्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध (Time-bound) जांच होना बेहद आवश्यक है।

    • उन्होंने साफ कहा कि यदि ये आरोप गलत और राजनीति से प्रेरित हैं, तो जांच के जरिए दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए, और यदि वाकई कोई दोषी है, तो उस पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास न टूटे।

    राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) भी एक्शन में

    मामला आस्था से जुड़े होने के कारण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (संघ) ने भी इस पूरे प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाया है। सूत्रों के अनुसार, संघ ने इस विवाद को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। मंदिर प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए बड़े बदलावों के संकेत मिल रहे हैं, जिसके तहत ट्रस्ट के भीतर काम कर रहे कुछ संदिग्ध कर्मचारियों की छंटनी (छंटनी यानी काम से हटाना) करने की तैयारी भी की जा रही है।

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