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    अल नीनो से महासागरों में उबाल, यूरोप में समय से पहले भीषण हीटवेव

    धरती का तापमान लगातार नए और खतरनाक रिकॉर्ड बना रहा है। यूरोपीय जलवायु एजेंसी कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) की ताजा रिपोर्ट ने दुनिया को चौंका दिया है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2026 इतिहास का दूसरा सबसे गर्म मई दर्ज किया गया है। जलवायु परिवर्तन (Climate Change) और समुद्र में विकसित हो रहे अल नीनो (El Niño) मौसम पैटर्न ने मिलकर न केवल जमीन बल्कि महासागरों के तापमान को भी खतरनाक स्तर पर पहुंचा दिया है।

    खतरनाक स्तर (1.5°C) के बेहद करीब पहुंची धरती

    पेरिस जलवायु समझौते के तहत वैज्ञानिकों ने वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C के भीतर सीमित रखने का लक्ष्य रखा था, लेकिन मई 2026 के आंकड़े बताते हैं कि हम इस लक्ष्मण रेखा के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।

    • औसत तापमान: मई 2026 में पृथ्वी की सतह का औसत तापमान 15.81°C दर्ज किया गया।
    • औद्योगिक-पूर्व स्तर से तुलना: यह तापमान 19वीं सदी की औद्योगिक क्रांति (1850-1900) के औसत तापमान से 1.42°C अधिक है।
    • रिकॉर्ड: इतिहास का अब तक का सबसे गर्म मई साल 2024 में दर्ज किया गया था, और यह साल (2026) मामूली अंतर से दूसरे स्थान पर रहा।

    अल नीनो की संभावित वापसी और महासागरों में उबाल

    भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर (Equatorial Pacific Ocean) में पानी असामान्य रूप से गर्म हो रहा है, जो प्रशांत महासागर में ‘अल नीनो’ परिस्थितियों के सक्रिय होने का साफ संकेत है।

    • समुद्री तापमान: मई में समुद्र की सतह का औसत तापमान 20.90° C रहा, जो मई महीने के इतिहास में दूसरा सबसे उच्चतम स्तर है।
    • असर: मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी महीनों में अल नीनो पूरी तरह प्रभावी हो जाएगा, जिससे दुनिया भर में बारिश का पैटर्न बिगड़ेगा। इसके कारण कई देशों में भीषण सूखा, अत्यधिक बाढ़ और समय से पहले तीव्र हीटवेव (लू) जैसी चरम मौसमी घटनाएं देखने को मिलेंगी।

    यूरोप में समय से पहले भीषण हीटवेव

    मई के शुरुआती दिनों में यूरोप में मौसम सामान्य था, लेकिन 20 मई के बाद स्थितियां अचानक बदल गईं। पश्चिमी यूरोप ने अपने इतिहास की सबसे शुरुआती और गंभीर हीटवेव का सामना किया। फ्रांस, ब्रिटेन, आयरलैंड और पुर्तगाल में गर्मी के कई स्थानीय रिकॉर्ड टूट गए और कई हिस्सों में उमस के कारण महसूस होने वाला तापमान (Feels-like temperature) 35°C से 40°C तक जा पहुंचा।

    ध्रुवीय क्षेत्रों (पोल्स) में पिघलती बर्फ

    ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बुरा असर पृथ्वी के ध्रुवों पर दिख रहा है:

    • आर्कटिक (उत्तर ध्रुव): यहां समुद्री बर्फ का दायरा सामान्य से लगभग 4% कम रहा, जो इतिहास का चौथा सबसे निचला स्तर है।
    • अंटार्कटिका (दक्षिण ध्रुव): यहां समुद्री बर्फ का विस्तार सामान्य औसत से 9% कम दर्ज किया गया है, जो बेहद चिंताजनक है।
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