More
    HomeHindi NewsDelhi News'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' लागू, जानें कानून के प्रभाव, 2029 के चुनाव...

    ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ लागू, जानें कानून के प्रभाव, 2029 के चुनाव हैं लक्ष्य

    भारत सरकार ने 16 अप्रैल 2026 को ऐतिहासिक ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून 2023) को आधिकारिक तौर पर लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब संसद में इसी कानून के क्रियान्वयन और परिसीमन (Delimitation) को लेकर तीखी बहस चल रही है।

    आधिकारिक अधिसूचना और लागू होने की तिथि

    केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय ने गजट नोटिफिकेशन जारी कर स्पष्ट किया कि 106वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2023 के प्रावधान 16 अप्रैल 2026 से प्रभावी माने जाएंगे। सरकार ने इस कानून की धारा 1 की उपधारा (2) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह तिथि निर्धारित की है।

    2029 के चुनावों पर लक्ष्य

    हालांकि यह कानून 2023 में ही पारित हो गया था, लेकिन इसके लागू होने की तकनीकी बाधाएं अब दूर की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि 2029 के लोकसभा चुनाव में महिलाओं को 33% आरक्षण का लाभ मिले। इसके लिए संसद में वर्तमान में 131वें संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा हो रही है, ताकि परिसीमन की प्रक्रिया को 2011 की जनगणना के आधार पर ही आगे बढ़ाया जा सके और देरी से बचा जा सके।

    संसद में बहस और राजनीतिक घमासान

    अधिसूचना जारी होने के दौरान सदन में माहौल गरमाया रहा। जहाँ सरकार इसे महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में एक निर्णायक कदम बता रही है, वहीं विपक्ष ने इसकी टाइमिंग पर सवाल उठाए हैं।

    • विपक्ष का तर्क: कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इसे ‘हैरान करने वाला’ कदम बताया है, क्योंकि कानून तब लागू किया गया जब उसमें संशोधन के लिए सदन में वोटिंग होनी बाकी है।
    • सरकार का पक्ष: गृह मंत्री और प्रधानमंत्री ने आश्वस्त किया है कि इस प्रक्रिया से किसी भी राज्य (विशेषकर दक्षिण भारतीय राज्यों) की सीटों के प्रतिनिधित्व में कमी नहीं आएगी।

    कानून के प्रभाव

    • सीटों का आरक्षण: लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
    • सदन का विस्तार: नए प्रस्तावों के अनुसार, लोकसभा की सदस्य संख्या 543 से बढ़ाकर 850 तक की जा सकती है, जिसमें लगभग 283 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

    यह अधिसूचना भारत की विधायी व्यवस्था में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक “तकनीकी और संवैधानिक” अनिवार्यता को पूरा करती है।

    RELATED ARTICLES

    Most Popular

    Recent Comments