टाइम लाइन : पाकिस्तानी घुसपैठ से भारत की ऐतिहासिक जीत तक, पढ़ें 1999 के उन 84 दिनों की गाथा
26 जुलाई का दिन भारतीय इतिहास में शौर्य, पराक्रम और अटूट देशभक्ति के प्रतीक के रूप में दर्ज है। सन 1999 में लद्दाख के कारगिल, द्रास, काकसार और बटालिक की बर्फ से ढकी शून्य से नीचे तापमान वाली दुर्गम चोटियों पर भारतीय सेना के वीर जांबाज जवानों ने पाकिस्तानी सेना और आतंकियों के नापाक इरादों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।
लगभग 84 दिनों तक चले इस दुर्गम युद्ध में भारत मां के 527 से अधिक वीर सपूतों ने अपने प्राणों का न्योछावर कर दिया, लेकिन तिरंगे की शान में कोई आंच नहीं आने दी। आइए जानते हैं 1999 के कारगिल युद्ध के उन ऐतिहासिक 84 दिनों की पूरी टाइमलाइन।
मई 1999: घुसपैठ का खुलासा और ‘ऑपरेशन विजय’ का आगाज
- 3 मई 1999: ताशी नामग्याल नाम के एक स्थानीय चरवाहे ने कारगिल की ऊंची पहाड़ियों पर संदेहास्पद गतिविधियों और हथियारबंद घुसपैठियों को देखा तथा भारतीय सेना को सूचित किया।
- 5 मई 1999: स्थिति का जायजा लेने गश्त पर निकले कैप्टन सौरभ कालिया और उनके 5 साथियों को पाकिस्तानी सैनिकों ने घेरकर बंदी बना लिया। उन्हें अमानवीय यातनाएं देकर शहीद कर दिया गया।
- 9-10 मई 1999: पाकिस्तानी सेना ने कारगिल में भीषण गोलाबारी कर भारतीय सेना के गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया। द्रास, काकसार और बटालिक सेक्टरों में बड़े पैमाने पर घुसपैठ की पुष्टि हुई।
- 15-26 मई 1999: भारतीय सेना ने घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए ‘ऑपरेशन विजय’ शुरू किया। 26 मई को भारतीय वायुसेना ने हवाई हमले शुरू करने के लिए ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ का ऐलान किया।
- 27-28 मई 1999: मिग-27 जेट में तकनीकी खराबी के बाद फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता को पाकिस्तान ने बंदी बना लिया, जबकि मिग-21 क्रैश होने से स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा शहीद हो गए। अगले दिन वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टर पर मिसाइल हमले में 4 जांबाज शहीद हुए।
जून 1999: टोलोलिंग की फतह और युद्ध का टर्निंग प्वाइंट
- 1-9 जून 1999: पाकिस्तान ने राष्ट्रीय राजमार्ग (NH 1A) को निशाना बनाकर सप्लाई लाइन काटने की कोशिश की। भारतीय सेना ने अपनी रणनीति बदलते हुए तोपखाने (बोफोर्स) का आक्रामक प्रयोग शुरू किया।
- 13 जून 1999: 2 राजपूताना राइफल्स के जवानों ने भीषण आमने-सामने की जंग के बाद टोलोलिंग पहाड़ी पर तिरंगा फहराया। यह कारगिल युद्ध की पहली और सबसे बड़ी रणनीतिक सफलता साबित हुई, जिसने युद्ध का रुख भारत के पक्ष में मोड़ दिया।
- 20 जून 1999: भारतीय सेना ने द्रास क्षेत्र की प्वाइंट 5140 चोटी पर पुनः नियंत्रण हासिल किया। यहीं कैप्टन विक्रम बत्रा ने अपना प्रसिद्ध उद्घोष “ये दिल मांगे मोर!” दिया था।
- 29 जून 1999: सेना ने टू-पिंपल्स और थ्री-पिंपल्स जैसी महत्वपूर्ण पोस्ट को दुश्मनों के कब्जे से छुड़ा लिया।
जुलाई 1999: टाइगर हिल पर विजय और पाकिस्तान का आत्मसमर्पण
- 4 जुलाई 1999: 18 ग्रेनेडियर्स के वीरों ने लगातार 11 घंटे के भीषण युद्ध के बाद सामरिक रूप से अति-महत्वपूर्ण टाइगर हिल पर फिर से भारत का परचम लहराया। इस लड़ाई में 19 वर्षीय ग्रनेडियर योगेंद्र सिंह यादव ने अदम्य साहस दिखाया।
- 5 जुलाई 1999: युद्ध में करारी हार और चौतरफा अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने वाशिंगटन में अमरीकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन से मुलाकात की और घुसपैठियों को वापस बुलाने का वादा किया।
- 11-14 जुलाई 1999: भारतीय बलों ने बटालिक और द्रास के अन्य क्षेत्रों से पाकिस्तानियों को खदेड़ दिया। 14 जुलाई को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने ‘ऑपरेशन विजय’ की सफलता की घोषणा की।
- 26 जुलाई 1999: भारतीय सेना ने आधिकारिक रूप से कारगिल की सभी चोटियों को घुसपैठियों से पूरी तरह मुक्त कराने का ऐलान किया। इसके साथ ही 84 दिनों तक चला यह ऐतिहासिक युद्ध भारत की विजय के साथ समाप्त हुआ।
अमर वीरों का बलिदान
कारगिल विजय दिवस केवल एक सैन्य जीत नहीं, बल्कि भारत के वीर सपूतों—कैप्टन विक्रम बत्रा (परमवीर चक्र), कैप्टन मनोज कुमार पांडे (परमवीर चक्र), सूबेदार योगेंद्र सिंह यादव (परमवीर चक्र) और सूबेदार संजय कुमार (परमवीर चक्र) जैसे असंख्य नायकों के अदम्य साहस और बलिदान की अमर गाथा है। आज पूरा देश उन सभी अमर शहीदों को नमन करता है।


