उत्तर भारत में कुछ दिनों की सक्रियता के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर कमजोर पड़ गया है. इसके विपरीत, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के राज्यों में मूसलाधार बारिश और बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मानसून की इस बेरुखी का सीधा असर खेती-किसानी और आम जनजीवन पर पड़ रहा है.
उत्तर भारत में उमस का प्रकोप और ‘मानसूनी ट्रफ’ का खिसकना
उत्तर भारत के राज्यों जैसे दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उमस भरी गर्मी एक बार फिर लौट आई है. दिल्ली में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के पार दर्ज किया गया है.
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तर भारत में मानसून के कमजोर पड़ने का मुख्य कारण ‘मानसूनी ट्रफ’ (Monsoon Trough) का हिमालय की तलहटी की ओर खिसक जाना है. जब यह ट्रफ उत्तर की तरफ शिफ्ट होती है, तब मैदानी इलाकों (उत्तर भारत) में बारिश थम जाती है और पहाड़ी व पूर्वोत्तर क्षेत्रों में अत्यधिक भारी बारिश शुरू हो जाती है.
पूर्वोत्तर में बाढ़ और भूस्खलन का कहर
इस मौसमी बदलाव के कारण पूर्वोत्तर भारत में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं:
अरुणाचल प्रदेश: मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है और 29 लोग गंभीर रूप से घायल हैं. राज्य के 26 जिलों के लगभग 425 गांव इस आपदा की चपेट में हैं.
- असम: ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां उफान पर हैं, जिससे लाखों लोग प्रभावित हुए हैं और हजारों हेक्टेयर खड़ी फसल पानी में डूब गई है.
खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा बुरा असर
मानसून की इस बेरुखी और अनिश्चितता का सबसे बड़ा झटका देश के कृषि क्षेत्र को लगा है:
- 16% की गिरावट: कमजोर मानसून के कारण धान सहित अन्य खरीफ फसलों की बुवाई का कुल रकबा 10 जुलाई तक 16 प्रतिशत घटकर 531.25 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 632.69 लाख हेक्टेयर था.
- धान की बुवाई में कमी: मुख्य खाद्य फसल धान (Paddy) की बुवाई का रकबा भी 8.63 फीसदी घटकर केवल 114.69 लाख हेक्टेयर दर्ज किया गया है.
क्यों कम और अनियमित हो रही है मानसूनी बारिश?
मौसम वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून के इस अजीबोगरीब व्यवहार के पीछे मुख्य रूप से जलवायु परिवर्तन (Climate Change) जिम्मेदार है.
- अनियमित पैटर्न: जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून का पारंपरिक पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है. अब कम समय में अत्यधिक बारिश (Flash Floods) हो जाती है या फिर लंबे समय तक सूखा (Dry Spell) बना रहता है.
- बादलों के झुंड का खिसकना: बादलों के बड़े पैच और हवाओं के रुख में अप्रत्याशित बदलाव के कारण मानसूनी हवाएं मैदानी भागों तक पहुंचने के बजाय सीधे हिमालय की पहाड़ियों या समुद्र की तरफ केंद्रित हो रही हैं.
- पूर्वानुमान में कठिनाई: मौसम के इस बदलते मिजाज के कारण अब सटीक दीर्घकालिक भविष्यवाणी करना भी वैज्ञानिकों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है.


